सूरज से ऊर्जा लेकर अपनों को जिंदा करेगा सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट

सूरज से ऊर्जा लेकर अपनों को जिंदा करेगा सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट

किसी के मरने के बाद क्या उसे फिर से जिंदा किया जा सकता है? यह सुनने में अंधविश्वास या साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है लेकिन रूसी ट्रांसह्यूमनिस्ट और लाइफ एक्सटेंशनिस्ट अलेक्सेई तरचिन टेक्नॉलजी की सहायता से ऐसा संभव होने का दावा करते हैं. डायसन स्फीयर (Dyson sphere) है वह मेगास्ट्रक्चर जिसकी सहायता से सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट किसी इंसान के निजी डेटा के आधार पर उसकी डिजिटल कॉपी तैयार करेगा. तरचिन 2014 से इस 'इम्मॉर्टैलिटी रोडमैप' पर कार्य कर रहे हैं. तरचिन ने हाल ही में एक पेपर में इसका पूरा उपाय बताया है.


Dyson Sphere: सुपरइंटेलिजेंट AI को आगे कार्य करने के लिए ऐसे ढंग पता होने चाहिए जिनसे किसी इंसान ने अपना जीवन जिया था, तभी वह उस इंसान जैसा बन सकेगा. एक बार डिजिटल कॉपी बनने के बाद शरीर को बनाना भी संभव हो सकेगा.


किसी के मरने के बाद क्या उसे फिर से जिंदा किया जा सकता है? यह सुनने में अंधविश्वास या साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है लेकिन रूसी ट्रांसह्यूमनिस्ट और लाइफ एक्सटेंशनिस्ट अलेक्सेई तरचिन टेक्नॉलजी की सहायता से ऐसा संभव होने का दावा करते हैं. डायसन स्फीयर (Dyson sphere) है वह मेगास्ट्रक्चर जिसकी सहायता से सुपरइंटेलिजेंट आर्टिफिशल एजेंट किसी इंसान के निजी डेटा के आधार पर उसकी डिजिटल कॉपी तैयार करेगा. तरचिन 2014 से इस 'इम्मॉर्टैलिटी रोडमैप' पर कार्य कर रहे हैं. तरचिन ने हाल ही में एक पेपर में इसका पूरा उपाय बताया है.

कैसे करेगा काम?

तरचिन अपने हर सपने, हर वार्ता और रोज के अनुभवों को डॉक्युमेंट कर रहे हैं. यहां तक कि वे अपने निजी विचारों और विचारधारा को भी स्वीकार करते हैं. सुपरइंटेलिजेंट AI को आगे कार्य करने के लिए ऐसे ढंग पता होने चाहिए जिनसे किसी इंसान ने अपना जीवन जिया था, तभी वह उस इंसान जैसा बन सकेगा. एक बार डिजिटल कॉपी बनने के बाद शरीर को बनाना भी संभव हो सकेगा. DNA संरचना की सहायता से क्लोनिंग की जा सकेगी और डिजिटल कॉपी की सहायता से उसे इंसान जैसा बनाया जा सकेगा. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के लिए जितनी ऊर्जा चाहिए होगी वह धरती से मिलना मुश्किल है. यहां कार्य आएगा डायसन स्फीयर. 

कैसे बनेगा?

दिवंगत फिजिसिस्ट फ्रीमन डायसन ने 1960 में यह कॉन्सेप्ट दिया था. इसमें उन्होंने ऐसे काल्पनिक शेल के बारे में बात की थी जो सूरज को घेरता हो. यह सूरज से निकलने वाली 400 सेप्टिलियन वॉट्स पर सेकंड की ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा. यह भिन्न-भिन्न कक्षा में घूम रहीं कई सैटलाइट्स से बनेगा. यही सबसे बड़ी चुनौती भी है. इतना विशाल ढांचा बनाना वैसे संभव नहीं नजर आता. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के फ्यूचर ऑफ ह्यूमैनिट इंस्टिट्यूट में रिसर्चर स्टुअर्ट आर्मस्ट्रॉन्ग का बोलना है कि सूरज को ढकते हुए ऐसा कुछ बनाना प्रैक्टिकल नहीं है.

क्लोनिंग से अलग

तरचिन का बोलना है कि डायसन स्फीयर वैसे बनाना मुश्किल है लेकिन नैनोरोबॉट से इसे किया जा सकता है. उनका बोलना है कि ये रोबॉट किसी ग्रह से लोहे और ऑक्सिजन का खनन प्रारम्भ कर सकते हैं और उसका इस्तेमाल सूरज के आसपास हीमाटाइट की सतह बनाने के लिए कर सकते हैं. हालांकि, बावजूद इसके एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्लोनिंग की तरह ही डिजिटल कॉपी का भी हूबहू इंसान के जैसा होना मुश्किल है. समय के साथ नए अनुभवों के आधार पर वह अलग इंसान बन सकता है. यही नहीं, सूरज या किसी और सितारे के इर्द-गिर्द यह घेरा बनाना केवल तब तक पास होगा जब तक सितारा जीवित है. उसके मरने के साथ ही ऊर्जा का यह स्रोत भी समाप्त हो जाएगा.


समुद्र में चीन-पाक की हेकड़ी होगी गुम, भारतीय नौसेना के MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर ने भरी पहली उड़ान

समुद्र में चीन-पाक की हेकड़ी होगी गुम, भारतीय नौसेना के MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर ने भरी पहली उड़ान

भारतीय नौसेना के लिए अमेरिका से खरीदे जाने वाले एमएच-60 रोमियो (MH-60 Romeo) मल्टीरोल हेलिकॉप्टर के पहले उड़ान की तस्वीर सामने आया है. इस तस्वीर को अमेरिकी नौसेना के नेवल एयर सिस्टम कमांड ने जारी किया है. अमेरिकी नौसेना ने बताया है कि इस हेलिकॉप्टर का फ्लाइट ट्रायल न्यूयॉर्क के ओवेगो में प्रारम्भ कर दिया गया है. हिंदुस्तान ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ 2.6 अरब US डॉलर की मूल्य में ऐसे 24 हेलिकॉप्टरों की खरीद का सौदा किया था. हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यह हेलिकॉप्टर उनकी मौजूदगी का पता लगाने में माहिर हैं. इसके अतिरिक्त ये शत्रु के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को नष्ट करने वाले खतरनाक मिसाइलों और तारपीडो से भी लैस होंगे. हालांकि, अभी जो तस्वीर आई है वह अमेरिका में लॉकहीड मॉर्टिन के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट की है. ऐसे में भारतीय नौसेना में इनके शामिल होने में अभी महीनों की समय लग सकता है.

भारतीय नौसेना के लिए अमेरिका से खरीदे जाने वाले एमएच-60 रोमियो (MH-60 Romeo) मल्टीरोल हेलिकॉप्टर के पहले उड़ान की तस्वीर सामने आया है. इस तस्वीर को अमेरिकी नौसेना के नेवल एयर सिस्टम कमांड ने जारी किया है. अमेरिकी नौसेना ने बताया है कि इस हेलिकॉप्टर का फ्लाइट ट्रायल न्यूयॉर्क के ओवेगो में प्रारम्भ कर दिया गया है. हिंदुस्तान ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ 2.6 अरब US डॉलर की मूल्य में ऐसे 24 हेलिकॉप्टरों की खरीद का सौदा किया था. हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यह हेलिकॉप्टर उनकी मौजूदगी का पता लगाने में माहिर हैं. इसके अतिरिक्त ये शत्रु के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को नष्ट करने वाले खतरनाक मिसाइलों और तारपीडो से भी लैस होंगे. हालांकि, अभी जो तस्वीर आई है वह अमेरिका में लॉकहीड मॉर्टिन के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट की है. ऐसे में भारतीय नौसेना में इनके शामिल होने में अभी महीनों की समय लग सकता है.



हिंद महासागर में चीन-पाक की चाल पर रखेगा पैनी नजर

साउथ चाइन सी को लेकर दादागिरी दिखाने के बाद अब चाइना की नजरें हिंद महासागर और अरब सागर पर हैं. चाइना की पनडुब्बियां, युद्धपोत और जासूसी जहाज लगातार अंडमान सागर और उसके आसपास गश्‍त लगा रहे हैं. उधर, जमीनी सरहदों पर पाकिस्‍तान और चाइना लगातार अपनी सैन्‍य जखीरे में अ‍त्‍याधुनिक टैंक और बख्‍तरबंद वाहन शामिल कर रहे हैं. इसी कारण हिंदुस्तान ने भी अपनी सामरिक ताकत को बढ़ाने के लिए कुछ समय पहले ही हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर चिनूक और अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे को खरीदा है.



24 एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्‍टर खरीद रहा भारत

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे के दौरान हिंदुस्तान ने 24 मल्टीयूज एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टर खरीदने के सौदे पर हस्‍ताक्षर किया था. एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टर हिंदुस्तान के पुराने हो चुके ब्रिटेन निर्मित सी किंग हेलिकॉप्टरों की स्थान लेंगे. ये हेलिकॉप्टर भारतीय रक्षा बलों को सतह और पनडुब्बी भेदी युद्धक अभियानों को सफलता से अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे. 15,157 करोड़ के ये हेलिकॉप्टर फ्रिगेट, विनाशकारी पोतों, क्रूजर और विमान वाहक पोतों से संचालित किए जा सकते हैं. एक हेलिकॉप्‍टर का दाम करीब 28 मिलियन US डॉलर है.


समुद्र में 'उड़ता फ्रिगेट' है अमेरिका का 'रोमियो'

एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टरों को समुद्र में उड़ता फ्रिगेट बोला जाता है. इस हेलिकॉप्‍टर में कई मोड वाले रेडॉर, नाइट विजन उपकरण, हेलिफायर मिसाइलें, एमके-54 टॉरपीडो और रॉकेट लगे हैं जो दुश्‍मन की सबमरीन को तबाह करने में सक्षम हैं. हिंदुस्तान के पास इस समय 140 युद्धपोत हैं लेकिन इस तरह के अटैक नेवल हेलिकॉप्‍टर की सख्‍त कमी महसूस की जा रही है. पूरे विश्व में करीब 300 एमएच 60 आर सी हॉक हेलिकॉप्टर प्रयोग किए जा रहे हैं. इस हेलिकॉप्‍टर की मारक क्षमता करीब 834 किलोमीटर है और वजन 689 किलो.



चीनी सबमरीन का काल बनेगा एमएच-60 रोमियो

एमएच 60 आर सी हॉक हेलिकॉप्टर भारतीय नौसेना के लिए आंख, कान और लंबी दूरी तक दुश्‍मन का सफाया करने वाले हथियार बनेंगे. ये हेलिकॉप्‍टर ऐसे समय पर भारतीय नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं जब हिंदुस्तान हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों और जंगी जहाजों के घुसपैठ का सामना कर रहा है. सी हॉक में लगे रेडॉर और सेंसर न केवल पानी के अंदर जा रही पनडुब्बियों की पहचान करने में सक्षम होंगे बल्कि समय रहते उनका शिकार भी कर सकेंगे. आलम यह है कि इस खुंखार शिकारी से हरेक पनडुब्‍बी का कैप्‍टन डरता है.


इन हथियारों से लैस है रोमियो हेलिकॉप्टर

एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टर कई भिन्न-भिन्न तरह के हथियारों से लैस हो सकता है. इसमें हथियारों को लगाने के लिए चार प्वाइंट्स दिए गए हैं. जिसमें लॉकहीड मार्टिन की एजीएम-114 हेलफायर एंटी-सरफेस मिसाइल लगाया जा सकता है. पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए इसमें पनडुब्बीरोधी एकेटी एमके 50 या एमके 46 सक्रिय /पैसिव टॉरपीडो को लॉन्च कर सकता है. अपनी सुरक्षा के लिए इसमें 7.62 एमएम की मशीनगन को भी लगाया जा सकता है.


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