दुनियाभर में जारी है कोरोना वैक्सीन की खोज

दुनियाभर में जारी है कोरोना वैक्सीन की खोज

वाशिंगटन:वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना वायरस आज लोगों की जान का शत्रु बन बैठा है, हर दिन कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों की संख्या व भी बढ़ती जा रही है, इतना ही नहीं इस वायरस कि चपेट में आ कर कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है, वहीं हर दिन कोई न कोई मासूम इस वायरस के आगे अपनी जिंदगी खो रहा है, अब यदि हम बात करें दुनियाभर में मृत्यु के आंकड़ों की तो WORLDOMETER वेबसाइट के अनुसार अब तक कुल 292,893 हो चुकी है। व अब भी इस वायरस का कोई उपचार नहीं मिल पाया है। वहीं हाल ही में इस बात का पता चला है कि कोरोना की वैक्सीन बनाने की रेस में सात से आठ संस्थाएं आगे हैं जबकि करीब 100 संस्थाएं कार्य कर रही हैं। डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रॉस एडहानोम घेबरेसस ने संयुक्त देश इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बताया कि पहले वैक्सीन को तैयार करने में 12 से 18 महीने का समय लगने की आसार थी।

दुनिया के 40 देशों, संगठनों व बैंकों से शोध, उपचार व जाँच के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की मदद मिलने से वैक्सीन का कार्य तेज हो गया है। उन्होंने बोला कि वायरस के सक्रिय होने के बाद से डब्ल्यूएचओ हजारों शोधकर्ताओं के साथ कार्य कर रहा है। करीब 400 वैज्ञानिक हर घड़ी जानवरों के मॉडल व क्लीनिकल ट्रायल के मॉडल पर कार्य कर रहे हैं ताकि जाँच व उपचार के ढंग को गति मिल सके।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर देना होगा: टेड्रॉस ने कहा, दुनियाभर के देश हजारों करोड़ ्स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं जो दुनियाभर के जीडीपी का दस प्रतिशत है। सबसे बेहतर निवेश स्वास्थ्य क्षेत्र में है। स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक जोर देना होगा। इससे बीमारियों को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकेगा जिससे लोगों की जिंदगी और पैसा बचेगा।

महामारी से सबक लेना होगा: महामारी से दुनियाभर के राष्ट्रों को सबक लेना होगा। आज के हिसाब से देखें तो 2030 तक 500 करोड़ लोगों के पास महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होंगी। सबसे अधिक किल्लत स्वास्थ्यकर्मी, महत्वपूर्ण दवाओं व अस्पतालों में साफ पानी की होगी।