पाकिस्तान ने 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और जीवन रक्षक दवाइयों को मानवीय मदद के तौर पर अफगानिस्तान पहुंचाने की भारत को दी इजाजत

पाकिस्तान ने 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और जीवन रक्षक दवाइयों को मानवीय मदद के तौर पर अफगानिस्तान पहुंचाने की भारत को दी इजाजत

Humanitarian Aid to Afghanistan From India: पाकिस्तान ने वाघा सीमा (Wagah Border) के जरिए अफगान ट्रकों द्वारा 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और जीवन रक्षक दवाइयों को मानवीय मदद के तौर पर अफगानिस्तान पहुंचाने की शुक्रवार को भारत को इजाजत दी है. इससे पहले सहायता पहुंचाने के तौर तरीकों को लेकर दोनों देशों में विवाद हो गया था (India Helps Afghanistan). भारत ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान को मदद पहुंचाने के तौर तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत चल रही है. भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि मानवीय सहायता पहुंचाने पर किसी प्रकार की शर्त नहीं होनी चाहिए.

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘हम अपनी बात दोहराते हैं कि मानवीय सहायता के लिए किसी प्रकार की शर्त नहीं होनी चाहिए.’ पाकिस्तान ने भारत को ‘मानवीय उद्देश्यों के लिए अपवाद स्वरूप’ अपने क्षेत्र से पड़ोसी अफगानिस्तान में गेहूं (Humanitarian Aid to Afghanistan) और जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाने की इजाजत देने के अपने फैसले के बारे में पिछले हफ्ते आधिकारिक रूप से बताया था.

पहले पाकिस्तान ने ठुकराया था प्रस्ताव

पाकिस्तान ने गुरुवार को उसके क्षेत्र का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान गेहूं भेजने के भारत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. हालांकि, विदेश दफ्तर ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के रास्ते अफगान ट्रकों के जरिए गेहूं और जीवन रक्षक दवाइयों को अफगानिस्तान भेजने के लिए नई दिल्ली को इजाजत देने के फैसले के बारे में भारत को आधिकारिक रूप से बता दिया गया है (Pakistan on India). उसने कहा कि फैसला किया गया है कि वाघा सीमा से तोरखम तक मदद ले जाने के लिए अफगान ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा.

उप उच्चायुक्त को बताया गया फैसला

विदेश दफ्तर ने कहा कि यह फैसला भारत के उप उच्चायुक्त को बता दिया गया है. पाकिस्तान जोर दे रहा था कि अफगानिस्तान भेजी जाने वाली गेहूं और दवाओं की खेप बाघा सीमा से पाकिस्तानी ट्रकों में रवाना की जाए जबकि भारत अपने ट्रक इस्तेमाल करना चाह रहा था (How India Helping Afghanistan). भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सहायता जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे और एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के माध्यम से राहत सामग्री का वितरण हो.

पाकिस्तान की तरफ से क्या कहा गया?

पाकिस्तान के विदेश दफ्तर ने कहा कि भारत सरकार (Indian Government) से मानवीय सहायता के वितरण में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम उठाने की गुजारिश की गई है. उसने यह भी कहा कि यह फैसला दिखाता है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के लोगों तक प्रस्तावित मानवीय मदद को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध और गंभीर है. विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल सर्दियों में मौसम खराब रहता है तो अफगानिस्तान में बच्चों समेत लाखों लोग भुखमरी का सामना कर सकते हैं. अफगानिस्तान पर अब तालिबान का शासन है जो अगस्त के मध्य में सत्ता पर काबिज हुआ है.


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।