इराक में आइएस के आत्‍मघाती हमले में 11 लोगों की मौत

इराक में आइएस के आत्‍मघाती हमले में 11 लोगों की मौत

इराक में कुख्‍यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट(आइएस) के हमले में हश्द शाबी फोर्स के मरने वाले सदस्यों की संख्या ग्यारह हो गई है। यह हमला सलाहुदीन प्रांत में हुआ। शनिवार को इस्लामिक स्टेट के आत्मघाती दस्ते ने एक चेकपोस्ट पर कब्जा करने के लिए यह हमला किया था। हश्द शाबी फोर्स ने उसका विरोध किया। इस हमले में 12 लोग घायल भी हुए हैं। मरने वालों में हश्त शाबी का एक कमांडर भी है। इससे पहले इराक में दो आत्मघाती बम विस्फोट भी हुए थे।

सीरिया और इराक में काफी सक्रिय है आइएस

ज्ञात हो  कि अबू बकर अल बगदादी द्वारा स्‍थापित आइएस संगठन सीरिया और इराक में काफी सक्रिय है। इस संगठन का उद्देश्‍य पूरे विश्‍व में इस्‍लामीकरण करना और आतंकी हरकतों से दहशत फैलानाहै। दुनिया के सभी मुल्‍कों में शरिया कानून को लागू करना है। इस संगठन में खतरनाक आत्‍मघाती ग्रुप भी हैं।

शुरुआती दिनों में इस संगठन को अल कायदा का समर्थन प्राप्‍त था। यह आतंकवादी संगठन हाईटेक और टेकसेवी है। अमेरिकी सेना द्वारा इराक के शासक सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से यहां आइएस संगठन काफी सक्रिय है। आइएस संगठन के निशाने पर इराक में तैनात संयुक्‍त सुरक्षा बल के जवान हैं।


नेपाल के प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार नहीं, पीएम ओली का फैसला असंवैधानिक

नेपाल के प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार नहीं, पीएम ओली का फैसला असंवैधानिक

नेपाल की संसद के निचले सदन को भंग करने के मामले में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान न्याय मित्र की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि सदन को भंग करने का प्रधानमंत्री ओली का फैसला असंवैधानिक था।

ओली के संसद के निचले सदन को भंग करने के फैसले के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए

सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड खेमे के साथ सत्ता पर काबिज होने की लड़ाई के बीच ओली ने पिछले साल 20 दिसंबर को अचानक संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था। 275 सदस्यीय सदन को भंग करने के ओली के फैसले के खिलाफ प्रचंड समर्थकों ने देशभर में धरना प्रदर्शन किया था।

ओली के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई


काठमांडू पोस्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 23 दिसंबर से सुनवाई चल रही थी, जो शुक्रवार को पूरी हो गई। न्याय मित्र की तरफ से पांच वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा।

नेपाल के संविधान प्रधानमंत्री को संसद को भंग करने का अधिकार नहीं, कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए

इनमें से एक वरिष्ठ वकील पूर्णमान शाक्य ने कहा कि नेपाल के संविधान में देश के प्रधानमंत्री को संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नहीं, संवैधानिक मामला है, इसलिए अदालत को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। एक सदस्य ने फैसले को असंवैधानिक बताया तो एक सदस्य ने कहा कि गलत नीयत से सदन को भंग किया गया। हालांकि, एक सदस्य ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार है।


सुप्रीम कोर्ट तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद सुनाएगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ सभी पक्षों की तरफ से पेश किए गए तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद फैसला सुनाएगी।


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