अब नाक में ही मर जाएगा कोरोना, अचूक नोजल स्‍प्रे को अंतिम रूप देने में जुटे ब्रिटिश वैज्ञानिक, जानें

अब नाक में ही मर जाएगा कोरोना, अचूक नोजल स्‍प्रे को अंतिम रूप देने में जुटे ब्रिटिश वैज्ञानिक, जानें

कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक भी शिद्दत से काम कर रहे हैं। इस लड़ाई में ब्रिटेन के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ब्रिटेन के वैज्ञानिक ऐसी नोजल स्‍प्रे को अंतिम रूप देने में जुटे हैं जो कोरोना संक्रमण की रोकथाम में कारगर साबित हो सकती है। समाचार एजेंसी पीटीआइ ने ब्रिटेन के एक अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि यह नोजल स्‍प्रे दो दिनों तक कोरोनो संक्रमण को रोक सकती है। बर्मिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इस नोजल स्प्रे का निर्माण करने में जुटे हैं।

उम्‍मीद है कि कुछ महीनों में यह नोजल स्‍प्रे दवा की दुकानों पर उपलब्‍ध होगी। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. रिचर्ड मोक्स (Dr Richard Moakes) ने 'द संडे टेलीग्राफ' को बताया कि उन्‍हें नए नोजल स्प्रे के फार्मूले पर पूरा भरोसा है कि यह कोरोना की रोकथाम में मददगार साबित होगी ताकि लोगों को शारीरिक दूरी जैसे एहतियातों से छुटकारा मिल सके और स्कूलों फिर से खोले जा सकें। इस नोजल स्प्रे को अभी तक नाम नहीं दिया गया है। यह उन अवयवों से बनी है जिन्‍हें पहले से ही चिकित्सा इस्‍तेमाल के लिए अनुमोदित किया गया है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्‍प्रे इंसानों के लिए सुरक्षित है और इसे आगे भी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी। इस नोजल स्‍प्रे में जिस फॉर्मूले का इस्‍तेमाल किया गया है वह वायरस को पकड़ कर इसे एक कोटिंग में एनकैप्सुलेट कर देता है जिससे संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। इसके इस्‍तेमाल से सांस लेना सुरक्षित होगा क्योंकि वायरस पहले ही निष्क्रिय कर दिया जाएगा। इसे लेना बेहद आसान है। डॉ. रिचर्ड मोक्स (Dr Richard Moakes) ने कहा कि मुझे यकीन है कि यह वायरस के खिलाफ प्रभावी होगा। अध्‍ययन में पाया गया है कि स्प्रे 48 घंटे तक कोरोना को फैलने से रोकता है।  


नेपाल के प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार नहीं, पीएम ओली का फैसला असंवैधानिक

नेपाल के प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार नहीं, पीएम ओली का फैसला असंवैधानिक

नेपाल की संसद के निचले सदन को भंग करने के मामले में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान न्याय मित्र की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि सदन को भंग करने का प्रधानमंत्री ओली का फैसला असंवैधानिक था।

ओली के संसद के निचले सदन को भंग करने के फैसले के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए

सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड खेमे के साथ सत्ता पर काबिज होने की लड़ाई के बीच ओली ने पिछले साल 20 दिसंबर को अचानक संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था। 275 सदस्यीय सदन को भंग करने के ओली के फैसले के खिलाफ प्रचंड समर्थकों ने देशभर में धरना प्रदर्शन किया था।

ओली के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई


काठमांडू पोस्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 23 दिसंबर से सुनवाई चल रही थी, जो शुक्रवार को पूरी हो गई। न्याय मित्र की तरफ से पांच वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा।

नेपाल के संविधान प्रधानमंत्री को संसद को भंग करने का अधिकार नहीं, कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए

इनमें से एक वरिष्ठ वकील पूर्णमान शाक्य ने कहा कि नेपाल के संविधान में देश के प्रधानमंत्री को संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नहीं, संवैधानिक मामला है, इसलिए अदालत को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। एक सदस्य ने फैसले को असंवैधानिक बताया तो एक सदस्य ने कहा कि गलत नीयत से सदन को भंग किया गया। हालांकि, एक सदस्य ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद भंग करने का अधिकार है।


सुप्रीम कोर्ट तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद सुनाएगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ सभी पक्षों की तरफ से पेश किए गए तथ्यों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद फैसला सुनाएगी।


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