World Mental Health Day 2020: मानसिक बीमारियां, उपचार व दवाओं के बारे में

World Mental Health Day 2020: मानसिक बीमारियां, उपचार व दवाओं के बारे में

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है ताकि दुनियाभर में तेजी से उभरते हुए मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलायी जा सके। इस वर्ष मेंटल हेल्थ डे की थीम स्वाभाविक रूप से कोविड-19 (Covid-19) महामारी व इसके प्रभावों से जुड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बारे में जोर देते हुए बोला है कि यही वह समय है जब सभी संगठनों, हेल्थकेयर प्रफेशनल्स व कम्यूनिटीज को साथ आना चाहिए व मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बात करनी चाहिए व जहां तक महत्वपूर्ण हो इसे बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए।

इस अभियान का एक बड़ा भाग भले ही सरकार के नेतृत्व वाली पहल से हो जिसमें सभी लोगों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की प्रयास करनी होगी लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों को इस अभियान में आगे आने की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर आदमी का खुद जागरूक होना व सहायता मांगने के लिए हाथ आगे बढ़ाना- ये दोनों ऐसे काम हैं जिन्हें व्यक्तिगत स्तर पर करने की आवश्यकता है। वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के मौके पर हम आपको अक्सर पूछे जाने वाले उन सवालों के बारे में बता रहे हैं जिसकी सहायता से आपको भी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बेहतर जानकारी मिल पाएगी।

 1. कैसे पता चलेगा कि मुझे या मेरे किसी दोस्त को मानसिक स्वास्थ्य समस्या है?
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ढेरों बीमारियां हैं व सभी के लक्षण एक दूसरे से अलग हो सकते हैं। हालांकि, यूएस नैशनल एलायंस ऑन मेंटल इलनेस (NAMI) की मानें तो सभी मानसिक रोंगों में कुछ सामान्य लक्षण अवश्य होते हैं, जैसे- अत्यधिक चिंता या डर महसूस करना, अत्यधिक उदासी महसूस करना या लो फील करना, कन्फ्यूजन की स्थिति, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन या क्रोध का बढ़ना, संभोग ड्राइव में परिवर्तन आना व रोजमर्रा के कार्यों को करने में परेशानी महसूस होना। बच्चों में मानसिक समस्याओं के लक्षण अलग हो सकते हैं, व यह उनकी आयु पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर आप खुद में या किसी प्रियजन या दोस्त में इस तरह के लक्षणों को देखें तो घबराने या डरने की बजाए सहायता के लिए चिकित्सक या हेल्थकेयर प्रफेशनल के पास जाएं।

2. क्या मैं बिना दवा या उपचार के मानसिक स्वास्थ्य के मामले से "उबर" सकता हूं?
इस दुनिया में ऐसी कोई रोग नहीं है जो बिना उचित उपचार व पुनर्वास के अच्छा हो जाए। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां व समस्याएं भी अन्य रोंगों की तरह ही हैं व आपको अच्छा होने व रोग से उबरने के लिए थेरेपी की जरूरत होगी। समस्या की अनदेखी करने से उसे दूर नहीं किया जा सकेगा। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य जानकार से उचित सलाह व मार्गदर्शन प्राप्त करने से आपको अपनी जीवनशैली व दृष्टिकोण में परिवर्तन करने में सहायता मिलेगी ताकि आप पूरी तरह से अच्छा हो सकें। वैसे तो उपचार व रिकवरी प्रक्रिया का एक बड़ा भाग जानकार पर निर्भर करता है, लेकिन इसके साथ ही आपको अपने प्रियजनों के प्यार, समर्थन व प्रेरणा की भी जरूरत होगी ताकि आप अपने ज़िंदगी में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर सकें जैसे- अभ्यास करना, अच्छी नींद लेना व पौष्टिक आहार का सेवन करना।

3. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के लिए अगर सहायता चाहिए तो मुझे कहां जाना चाहिए?
अधिकतर अस्पताल, क्लीनिक व हेल्थकेयर ऐप में मेंटल हेल्थ प्रफेशनल्स से बात करने व परामर्श लेने की व्यवस्था होती है जिसकी सहायता से आप सीधे उन तक पहुंच सकते हैं। यदि आप किसी ऐसे एक्सपर्ट से सीधे सम्पर्क करने के बारे में अनिश्चित हैं, जिन्हें आप नहीं जानते हैं, तो पहले अपने रेग्युलर चिकित्सक या फैमिली चिकित्सक से परामर्श करें। अपनी मानसिक समस्याओं के बारे में अपने चिकित्सक से बात करें व उनसे कहें कि वे ही आपको किसी जानकार के पास रेफर करें।

4. क्या सभी मेंटल हेल्थ प्रफेशनल एक समान होते हैं?
नहीं। मूल रूप मेंटल हेल्थ प्रफेशनल 2 तरह के होते हैं: मनोचिकित्सक व मनोवैज्ञानिक। मनोचिकित्सक, मेडिकली ट्रेन्ड चिकित्सक होते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य में स्पेशलाइज करते हैं व रोग के हिसाब से आपको दवाइयां प्रिस्क्राइब करते हैं। तो वहीं, मनोवैज्ञानिकों के पास मनोविज्ञान यानी साइकॉलजी की डिग्री होती है, वे आपको दवा लिखकर नहीं देते व आमतौर पर मरीज को साइकोथेरेपी देते हैं जिसे टॉक थेरेपी के रूप में भी जाना जाता है। आपको अपनी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के लिए किससे सम्पर्क करना चाहिए यह आपकी समस्या की गंभीरता व लाइन ऑफ ट्रीटमेंट पर निर्भर करता है जो आपकी जरूरतों के अनुकूल हो।

5. क्या मैं एंटीडिप्रेसेंट दवा या अन्य दवाइयों का प्रयोग किए बिना ही अच्छा होने कि सम्भावना हूं?
आपको एंटीडिप्रेसेंट की जरूरत है या नहीं यह आपकी मानसिक स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है। डिप्रेशन, घबराहट, मूड डिसऑर्डर या चिंता से जुड़ी रोंगों के हल्के या मध्यम श्रेणी के मामलों में, एंटीडिप्रेसेंट या किसी भी तरह की दवा प्रिस्क्राइब नहीं की जाती। इसकी जगह, कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी सीबीटी (संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी) संज्ञानात्मक अभ्यास जैसे "लीव्स ऑन अ स्ट्रीम", मेडिटेशन, व्यायाम व योग, स्वस्थ आहार व नींद के शेड्यूल को बनाए रखना जैसी चीजों की सलाह दी जाती है। हालांकि जब किसी आदमी की मानसिक समस्या मध्यम से लेकर गंभीर स्थिति तक पहुंच जाती है तब उसे एंटीडिप्रेसेंट जैसे- सिलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई), सेरोटोनिन-नोरेपाइनफ्राइन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएनआरआई) व नींद को बढ़ावा देने के लिए हल्के सिडेटिव्स (दर्दनिवारक दवाइयां) मनोचिकित्सक द्वारा प्रिस्क्राइब की जाती हैं।

6. क्या एंटीडिप्रेसेंट्स की लत लग जाती है? क्या ये मेरे व्यक्तित्व को बदल सकता है?
हम आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि लोगों के बीच ये आम धारणा है कि एंटीडिप्रेसेंट्स दवाइयों की लत लग जाती है लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। एंटीडिप्रेसेंट्स का लंबे समय तक उपयोग करने पर उस पर निर्भरता जरूर हो जाती है लेकिन निर्भरता व लत दोनों में अंतर है। नशा एक प्रकार की मानसिक रोग है व एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाइयां जो मानसिक रोंगों को दूर करने के लिए मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर को टार्गेट करती हैं, वे किसी तरह की लत की वजह बन जाएं, ये संभव नहीं लगता। यदि दवाओं की कोई श्रेणी है जिसकी लत लग सकती है तो वह पेनकिलर्स व ओपिऑयड्स हैं, एंटीडिप्रेसेंट्स नहीं।

इसके अलावा, यदि आप मनोचिकित्सक के उचित मार्गदर्शन व बताई गई डोज के हिसाब से ही एंटीडिप्रेसेंट्स का सेवन करें तो यह आपके व्यक्तित्व को भी नहीं बदलती है। यदि व्यक्तित्व में किसी तरह का छोटी परिवर्तन जैसे- भावनाओं की कमी देखने को मिलती भी है तो मनोचिकित्सक तुरंत दवा की डोज को कम कर देते हैं या दवाओं के कॉम्बिनेशन को बदल देते हैं जो आपके शरीर को बेहतर सूट करे। एंटीडिप्रेसेंट लेने पर आरंभ में कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे भूख में कमी, संभोग ड्राइव में परिवर्तन या नींद आने में कठिनाई, लेकिन ये सारी चीजें कुछ दिनों बाद अच्छा हो जाती हैं।

7. अगर लोगों को पता चल जाए कि मैं थेरेपी ले रहा हूं या एंटीडिप्रेसेंट्स यूज करता हूं तो मैं क्या करूं?
यदि आपको आज किसी तरह का संक्रमण हो जाए व चिकित्सक आपको अच्छा करने के लिए एंटीबायोटिक्स, स्वस्थ आहार व आराम करने का एक कोर्स निर्धारित करते हैं, तो आप "लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा" या "वे क्या कहेंगे" जैसे सवालों के बारे में नहीं सोचेंगे। तो फिर मेंटल हेल्थ के बारे में ऐसे सवालों की चिंता क्यों। आपको अपने आपको व आसपास उपस्थित लोगों को भी ये याद दिलाने की जरूरत है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मामले व बीमारियां किसी भी दूसरी रोग की तरह ही है। किसी भी दूसरी रोग की तरह मानसिक रोग से भी निपटने के लिए आपको जिस वस्तु की सबसे ज्यादा आवश्यकता है- वह है उचित इलाज, देखभाल व दूसरों का सपोर्ट। रोग से पूरी तरह से रिकवर होने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है कि आप शर्म व कलंक (स्टिगमा) जैसी चीजों को पीछे छोड़ दें।