ब्लड प्रेशर बढ़ जाने पर करें यह उपचार

ब्लड प्रेशर बढ़ जाने पर करें यह उपचार

आज के समय में उच्च रक्तचाप की समस्या बेहद आम है। उच्च रक्तचाप का अर्थ है धमनियों में उच्च दबाव। धमनियां वास्तव में वे वाहिकाएं होती हैं जो रक्त को हृदय से शरीर के सभी ऊतकों और अंगों तक ले जाती हैं। जब व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ जाता है तो इसका अर्थ है कि आपके हृदय को आपके खून को पंप करने के लिए आवश्यकता से अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। सामान्य रक्तचाप 120/80 होता है, लेकिन जब रक्तचाप 180/110 या उससे भी अधिक हो जाता है, तो आपका रक्तचाप काफी उच्च होता है और इस स्थिति में आपको तुरंत उपचार की जरूरत होती है। हाई ब्लड प्रेशर का दुष्प्रभाव इस तरह समझा जा सकता है कि इसके कारण आपके शरीर का अंग भी डैमेज हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत ब्लड प्रेशर को मैनेज करने की जरूरत होती है। तो चलिए जानते हैं हाई ब्लड प्रेशर बहुत अधिक बढ़ जाने पर क्या किया जाए−

दिखते हैं यह लक्षण

यूं तो हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण कम ही नजर आते हैं, लेकिन जब स्थिति बहुत अधिक खराब होती है तो व्यक्ति में अचानक बदलाव नजर आता है। इन लक्षणों में सिरदर्द से लेकर धुंधली दृष्टि, दौरा पड़ना, सीने में दर्द, सांस की तकलीफ बढ़ना, नाक से खून बहना आदि है। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को कॉल करना चाहिए।

यह है आपातकालीन उपचार

अगर उच्च रक्तचाप के आपातकालीन उपचार की बात की जाए तो इसके लिए इंजेक्शन वाली दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि रक्तचाप का सीमा से काफी अधिक बढ़ जाने पर सबसे पहले दवाओं के जरिए सबसे पहले ब्लड प्रेशर को कम करने का प्रयास किया जाता है। अस्पताल में उच्च रक्तचाप की मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में सोडियम नाइट्रोप्रासाइड (निप्राइड), लेबेलेटोल (नॉर्मोडाइन), और निकार्डीपीन (कार्डीन) जैसी दवाइयों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ब्लड प्रेशर को कम करने के साथ−साथ हाई ब्लड प्रेशर के कारण जिन अंगों को क्षति हुई है, उसका भी तुरंत इलाज किए जाने की जरूरत होती है।

क्यों होती है यह समस्या

वैसे तो उच्च रक्तचाप की समस्या से कई लोग ग्रसित हैं, लेकिन रक्तचाप का इस सीमा तक बढ़ जाना कि उससे आपके शरीर के अंग प्रभावित होने लगे, यह वाकई में एक गंभीर स्थिति है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा अक्सर उन मामलों में देखने को मिलता है, जब लोग अपने ब्लड प्रेशर की समस्या को इग्नोर करते हैं और उसे नियमित रूप से मॉनिटर नहीं करते या फिर वह अपनी दवाइयों का सेवन सही तरीके से नहीं करते। इसलिए यह कहा जाता है कि उच्च रक्तचाप होने पर उसकी मानिटरिंग जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से एक्सरसाइज व खानपान में बदलाव के जरिए भी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।