कोलोन कैंसर से दूर रहने के लिए हाई फाइबर डाइट का करे सेवन

कोलोन कैंसर से दूर रहने के लिए हाई फाइबर डाइट का करे सेवन

World Cancer Day 2020: फाइबर हमारे दैनिक आहार का एक जरूरी भाग है. यह न केवल हमारे पाचन तंत्र के लिए अच्छा है, बल्कि इसके कई अन्य स्वास्थ्य फायदा भी हैं. हमने हमेशा पोषण विशेषज्ञ व स्वास्थ्य विशेषज्ञों को यह कहते हुए सुना है कि फाइबर हमारे आहार में जरूरी है क्योंकि यह हमें लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता, जो वजन घटाने को बढ़ावा देता है. कई शोधों में इस बात के भी सबूत मिले हैं कि उच्च फाइबर आहार कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम ( High-Fibre Diet Can Lower Colon Cancer Risk ) करता है.

कोलोरेक्टल कैंसर के कारण ( Colon cancer Causes )
कोलोरेक्टल कैंसर हिंदुस्तान में पुरुषों व स्त्रियों दोनों में पाया जाने वाला सातवां सबसे आम कैंसर है. कोलन कैंसर का कारण बहुक्रियाशील व जटिल है. इसके जोखिम कारकों में गतिहीन ज़िंदगी शैली, मोटापा, तंबाकू का उपयोग, कम फाइबर आहार व शराब का सेवन शामिल हैं.

High-Fibre Diet Can Lower Colon Cancer Risk
विशेषज्ञों के अनुसार उच्च फाइबर आहार कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करने के वाला माना जाता है, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रांजिट समय को कम करके, फेकल कार्सिनोजेन्स के निर्बल पड़ने, स्टूल बल्क को बढ़ाने व एंटी-कार्सिनोजेनिक गुणों के साथ फाइबर को शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के लिए बैक्टीरिया किण्वन का कारण बनता है.

कोलोनिक एडेनोमा एक प्रकार की गांठ कुछ लोगों में कैंसर होने का कारण हो सकते हैं. उच्च फाइबर आहार में कोलोरेक्टल एडेनोमा व डिस्टल कोलन कैंसर के विकास को रोकने के गुण देखे गए हैं. विशेष तौर पर अनाल व फलों से मिलने वाला फाइबर एडेनोमा-कार्सिनोमा अनुक्रम में जल्दी कार्य कर सकता है व एडेनोमा व कैंसर दोनों के जोखिम को कम करता है.

डाइटरी फाइबर नॉन- स्टार्च कार्ब्स है जो प्लांट फूड में पाया जाता है. ये 2 तरह का होता है: घुलनशील व अघुलनशील. फाइबर के लिए कोई मांसाहारी (पशु) स्रोत नहीं हैं.

घुलनशील फाइबर ( Soluble Fibre )
घुलनशील फाइबर पानी में घुल कर जैल का रूप लेता है. यह कोलोन में जल्दी पच जाता है. जिससे सूजन व गैस भी हो सकती है. घुलनशील फाइबर अक्सर दिल व मधुमेह की रोकथाम व पेट के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है, क्योंकि यह रक्त कोलेस्ट्रॉल व ग्लूकोज के स्तर को कम करता है. घुलनशील फाइबर यह कार्य 2 उपायों से करता है. सबसे पहले, घुलनशील फाइबर शॉर्ट-चेन फैटी एसिड से किण्वित होता है, ये पित्त संश्लेषण के लिए लिवर के जरिए अवशोषित व मेटाबोलाइज्ड होते हैं. दूसरा, फाइबर बिना पचे शरीर से गुजरता है. घुलनशील-फाइबर स्रोतों में सेब, जौ, खट्टे फल, मटर, एवोकैडो, भूसी, फलियां, जई, राई, व कई सब्जियां, जैसे ब्रोकोली व गाजर शामिल हैं.

अघुलनशील फाइबर ( Insoluble fibre )
अघुलनशील फाइबर पानी में नहीं घुलता है व यह बहुत कम किण्वनीय या गैसी है. यह मल में पानी जोड़ कर त्याग को बढ़ावा देता है, तथा मल को नरम बनाने में मदद करता है. अघुलनशील फाइबर स्रोतों में ब्राउन चावल, फलियां, बीज, साबुत अनाज,सब्जियां जैसे, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, गोभी व गेहूं की भूसी शामिल हैं.

उपलब्ध फाइबर सप्लीमेंट्स में मसूड़े, इनुलिन, लिग्निन, पेक्टिन व साइलियम या इसबगोल भूसी शामिल हैं. जूस फाइबर का अच्छा स्रोत नहीं है. यहां तक कि अगर जूस को ताजे फल व सब्जियों से बनाया जाता है, तो अक्सर रस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर को हटा दिया जाता है. आदर्श रूप से, आपको सारे खाद्य स्रोतों से फाइबर प्राप्त करना चाहिए, न कि पूरक या रस.

शोधों से पता चला कि कुल फाइबर व अन्न फाइबर में रोजाना 10 ग्राम की वृद्धि कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम में 10 फीसदी की कमी से जुड़ी थी. फाइबर का सेवन प्रति दिन 25 से 35 ग्राम या 14 ग्राम फाइबर / 1000kCal के अनुपात का सेवन करें.

कोलोन कैंसर रातोंरात नहीं होता है. आमतौर पर इसे विकसित होने में कई वर्ष लग सकते हैं. इसलिए कम आयु में साबुत अन्न खाना प्रारम्भ करना जरूरी है.

साबुत अन्न अधिक खाना न केवल कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को कम करता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ब्ल्ड शुगर लेवल बनाए रखने व कब्ज को दूर करने में भी मददगार होता है. साबुत अन्न व कुल आहार फाइबर को पहले से ही दिल रोग के विरूद्ध सुरक्षात्मक के रूप में पहचाना गया है. फाइबर कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है. यह पित्त एसिड को भी बांधता है, एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के रक्त के स्तर को कम करता है. जब एक उच्च फाइबर आहार में बहुत सारे फल व सब्जियां शामिल होती हैं, तो यह रक्तचाप को कम करने में मदद करता है.

Increase Fibre Diet
अपने फाइबर सेवन को धीरे-धीरे बढ़ाना सुनिश्चित करें. आहार में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर शामिल करने से गैस हो सकती है. इसके बजाय, अपने प्रत्येक भोजन में फल के एक टुकड़े को शामिल करके या संसाधित या परिष्कृत अन्न को अन्य अन्न के साथ जोड़ कर अधिक फाइबर लेने का कोशिश करें.

फाइबर प्रसंस्कृत मांस की खपत पर उत्पादित कार्सिनोजेनिक एन-नाइट्रोसो यौगिकों को कोलोरेक्टल मार्ग के सम्पर्क को कम कर सकता है. खूब पानी पिएं, हाइड्रेटेड रहने से अलावा फाइबर पेट की समस्याओं का कारण नहीं बनता है.