सेक्शुअल हेल्थ से जुड़े ये 8 नियम हर महिला को होने चाहिए पता

सेक्शुअल हेल्थ से जुड़े ये 8 नियम हर महिला को होने चाहिए पता

विमिन्स हेल्थ डे 2020 (International Womens Health Day 2020): हर महिला के सेक्शुअल व रिप्रोडक्टिव (प्रजनन) हेल्थ से जुड़े कुछ अधिकार होते हैं।  इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह महिला संसार के किस हिस्से में रहती है, उसकी आयु क्या है, वह किस जाति या धर्म की है। यही कारण है कि स्त्रियों की स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के मकसद से हर वर्ष 28 मई को इंटरनेशनल विमिन्स हेल्थ डे मनाया जाता है। इसकी आरंभ वर्ष 1987 में हुई थी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर की स्त्रियों की सेक्शुअल व प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों को बढ़ावा देना है।



महिलाओं की स्वास्थ्य को सम्मान देना क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तो सेक्शुअल व रिप्रोडक्टिव हेल्थ को स्त्रियों व पुरुष दोनों के मौलिक अधिकार के तौर पर मान्यता दी है। लेकिन जर्नल ऑफ विमिन्स हेल्थ में वर्ष 2019 में प्रकाशित एक स्टडी की मानें तो अब भी ऐसी कई रुकावटें हैं, जिनकी वजह से स्त्रियों को अपनी सेक्शुअल हेल्थ की आवश्यकता से जुड़ी ठीक काउंसलिंग व मदद नहीं मिल पाती।

इसके अतिरिक्त औनलाइन जर्नल ऑफ हेल्थ एंड अलाइड साइंसेज में वर्ष 2011 में प्रकाशित एक पेपर में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि किस तरह गर्भपात व गर्भनिरोध का अधिकार, प्रजनन संबंधी विकल्प व जननांग के खतना से सुरक्षा जैसे अधिकार कई भारतीय स्त्रियों के लिए सिर्फ कागज पर उपस्थित हैं। सच में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जानकारी का अभाव व सामाजिक भेदभाव के कारण महिलाएं या तो अपने इन अधिकारों से वंचित हैं या फिर उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है।

बेहद महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अब अज्ञानता की इस बेड़ी को तोड़ें व अपने शरीर के बारे में तथ्यों के आधार पर ठीक निर्णय लें। विमिन्स हेल्थ डे के मौके पर हम उन 8 महत्वपूर्ण नियमों के बारे में बता रहे हैं, जिनका पालन हर महिला को करना चाहिए :

1. ठीक गाइनेकॉलजिस्ट की तलाश करें
गाइनेकॉलजिस्ट ही वह शख्स है, जिनसे महिलाएं अपनी सेक्शुअल व रिप्रोडक्टिव (प्रजनन) हेल्थ से जुड़ी सभी तरह की समस्याओं के बारे में बात कर सकती हैं। फिर चाहे संभोग के दौरान दर्द की परेशानी हो, STD की समस्या हो या फिर मेनोपॉज से जुड़ी कोई बात। लिहाजा आप जहां रहती हैं, उसी इलाके में किसी अच्छे गाइनेकॉलजिस्ट की तलाश करें व जब भी सेक्शुअल हेल्थ से जुड़ी कोई आवश्यकता हो तो उनसे बात करने में संकोच महसूस न करें।

2. अपने शरीर को लेकर जागरुक बनें
बहुत सी स्त्रियों को अपने ही शरीर को लेकर शर्मिंदगी महसूस होती है व बहुत सी स्त्रियों ने तो कभी अपने ही जननांगों को देखा भी नहीं होगा। अगर आप भी उन स्त्रियों में से हैं तो एक आइना लें व अपने शरीर पर एक नजर डालें। अपने शरीर के हर एक कर्व से प्यार करना सीखें, क्योंकि अगर आप शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हैं तो आपके शरीर का रंग-रूप, आकार व साइज कोई अर्थ नहीं रखता।

3. सुरक्षित संभोग के नियम
सुरक्षित संभोग का मतलब सिर्फ पार्टनर से कॉन्डम प्रयोग करने के लिए बोलना या खुद ही फीमेल कॉन्डम का प्रयोग करने तक सीमित नहीं है। अपने गाइनेकॉलजिस्ट से सम्पर्क करें व आपके पास सेफ संभोग से जुड़ी जितने भी विकल्प उपस्थित हैं उनके बारे में जानें। फिर चाहे गर्भनिरोधक गोली हो या फिर इंट्रायूट्राइन डिवाइस (IUD)।

4. STD की जाँच करवाएं
आपके लिए यह जानना बेहद महत्वपूर्ण है कि सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज यानी STD सिर्फ पेनिट्रेटिव या वजाइनल संभोग के जरिए ही नहीं बल्कि असुरक्षित ओरल संभोग के जरिए भी फैल सकता है। लिहाजा पैप स्मियर टेस्ट करवाकर आप अपना व अपने पार्टनर दोनों का ज़िंदगी बचा सकती हैं।

5. अपने दर्द को गंभीरता से लें
बहुत सी महिलाएं दर्द को अपनी सेक्शुअल व रिप्रोडक्टिव स्वास्थ्य का एक सामान्य सा भाग मानती हैं व इसे गंभीरता से नहीं लेतीं। लेकिन अगर दर्द बेहद हो तो यह आपकी शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दुर्बल बना सकता है। लिहाजा अगर आपको पीरियड्स के दौरान या फिर संभोग के दौरान बेहद दर्द हो रहा हो तो बिना देर किए अपने गाइनेकॉलजिस्ट से सम्पर्क करें।

6. भ्रम नहीं निवारण को चुनें
संभोग या पीरियड्स के बारे में किसी भी तरह की गलतफहमी या भ्रम, खासकर प्रेगनेंसी से जुड़ी पर यकीन करने की बजाए, अपनी चिकित्सक से बात करें व अपने ज़िंदगी के बार में तथ्यों के आधार पर ठीक निर्णय लें।

7. मेनोपॉज का मतलब अंत नहीं
जब कोई महिला मेनोपॉज पर पहुंच जाती है तो उसका प्रजनन सिस्टम भले ही धीमा हो जाए, लेकिन इस स्टेज पर आकर भी आपकी सेक्शुअल हेल्थ की सम्मान कम नहीं होती। मेनोपॉज के बाद भी अगर आप सेक्शुअली ऐक्टिव हैं तो अपनी सेक्शुअल हेल्थ को गंभीरता से लेना बेहद महत्वपूर्ण है, अन्यथा आपको STD होने का खतरा होने कि सम्भावना है।

8. अपनी सहमति को महत्व दें
अपनी सहमति व विकल्पों को पूरी सम्मान दें। आप भले ही किसी तरह की कोई समस्या होने पर डॉक्टर, अपने पैरंट्स, जीवनसाथी या समाज के लोगों से सलाह-मशविरा करें, लेकिन आखिर में अपने शरीर के बारे में आपको क्या निर्णय लेना है यह आपके हाथों में ही होना चाहिए।