इन 5 बीमारियों के लक्षण पुरुषों व स्त्रियों में होते हैं भिन्न-भिन्न

 इन 5 बीमारियों के लक्षण पुरुषों व स्त्रियों में  होते हैं भिन्न-भिन्न

पुरुषों व स्त्रियों को बीमारियां भिन्न-भिन्न ढंग से प्रभावित करती हैं, क्योंकि उनका शरीर का ढांचा, हार्मोन भिन्न-भिन्न होते हैं. तभी तो बीमारियों के लक्षण भी अलग नजर आते हैं. उसी तरह इन बीमारियों के तरीका भी अलग होते हैं.

हार्ट अटैक 
www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डाक्टर नबी वली का बोलना है कि जब आदमी की एक या एक से अधिक कोरोनरी धमनी अवरुद्ध हो जाए तो हार्ट अटैक आ सकता है. स्त्रियों व पुरुषों में हार्ट अटैक के एक जैसे लक्षण नहीं होते हैं. सीने में दर्द हार्ट अटैक का एक आम लक्षण हैं, लेकिन हार्ट अटैक के समय पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में जी मिचलाना, उलटी जैसे लक्षण अधिक दिखाई देते हैं. उन्हें शरीर के ऊपरी हिस्से में ज्यादा दर्द का अनुभव होता है, जिसमें गर्दन, पीठ, भुजाएं व कंधे की हड्डी में दर्द शामिल है. स्त्रियों को जबड़े में दर्द है तो होने कि सम्भावना है कि हार्ट अटैक आया है, क्योंकि इसके पास की नसें दिल से निकलती हैं.

स्ट्रोक
50 वर्ष की आयु तक पुरुषों व स्त्रियों में स्ट्रोक की संभावना एक समान होती है व इस आयु के बाद स्त्रियों में स्ट्रोक की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक हो जाती है. स्ट्रोक आने पर चेहरे, बाजू या टांग में कमजोरी या सुन्न होना, चेहरे का एक ओर लटकना, बोलने में परेशानी, किसी एक हाथ या पैर में पैरालिसिस, चलने में परेशानी, लडख़ड़ा कर चलना, संतुलन न बना पाना, चक्कर आना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं. स्त्रियों में कई बार कुछ अलग लक्षण दिखाई देते हैं. इसमें आकस्मित हिचकी आना, मतली, आकस्मित कमजोरी महसूस होना, आकस्मित छाती में दर्द होना, सांस लेने में कठिनाई व धड़कनों में तेजी शामिल हैं. इसके अतिरिक्त पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को रिकवर होने में ज्यादा परेशानी होती है.

मुंहासे
स्त्रियों व पुरुषों की स्कीन भिन्न-भिन्न होती है. आमतौर पर स्त्रियों को मुंहासे निकलने की संभावना पुरुषों से ज्यादा होती है. स्त्रियों के मुंहासों के लिए हार्मोंस को जिम्मेदार माना जाता है. www.myupchar.com के डाक्टर उमर अफरोज का बोलना है कि टीन-एज व गर्भावस्था के दौरान हार्मोन बदलते रहते हैं. इस समय ऑयल ग्रंथियों की गतिविधि बढ़ जाती है व कभी-कभी अत्यधिक कैमिकल निकलने लगता है, जो कि स्कीन के फॉलिकल को रोकता है. यह मुंहासे का कारण बनता है. जिन पुरुषों की त्‍वचा ऑयली होती है व बड़े छिद्रों वाली होती है उन पुरूषों की स्कीन पर ज्‍यादा एक्‍ने (मुंहासे) होते हैं. उन्‍हें शेव करने के बाद मुंहासे होने की समस्‍या हो सकती है. पुरुषों की स्कीन स्त्रियों के मुकाबले थोड़ी कठोर होती है, इसलिए उनके लिए तरीका भी स्त्रियों से अलग होते हैं.

ऑस्टियोपोरोसिस
अधिक उम्र, विटामिन डी व कैल्शियम की कमी इस बीमारी का मुख्य कारण हैं. स्त्रियों में इस बीमारी का प्रकोप थोड़ा ज्यादा देखने को मिलता है. स्त्रियों में 45 से 50 वर्ष व पुरुषों में 55 वर्ष के आसपास इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. स्त्रियों में मेनोपॉज के दौरान हड्डियों का निर्बल होना प्रमुख है व पुरुषों में यह रोग पोषक तत्वों की कमी से होने कि सम्भावना है. वहीं पुरुषों में इसके लिए टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की कमी जिम्मेदार है.

तनाव
तनाव पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को ज्यादा शिकार बनाता है. पुरुषों व मह‍िलाओं में स्‍ट्रेस हार्मोंस का बढ़ना भिन्न-भिन्न तरीका व दर से होता है. यूं तो तनाव के लक्षण दोनों में समान रहते हैं जैसे सिर दर्द, चिढ़चिढ़ापन, थकान, बीपी बढ़ना या कम होना, भूख न लगना लेकिन स्त्रियों में तनाव के कारण पेट बेकार होने की भी शिकायत होती है.