खराब नींद के कारण किशोरों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा

खराब नींद के कारण किशोरों में बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा

स्वस्थ (Healthy) रहने के लिए अच्छी नींद (Sleep) बहुत महत्वपूर्ण है। अगर लंबे समय तक कोई पूरी नींद न लें तो बेचैनी, थकान, दिन में नींद आने के साथ-साथ आकस्मित बेहद वजन घटना या बढ़ना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। यही नहीं, नींद की कमी मस्तिष्क (Brain) को भी प्रभावित करती है। छोटी आयु में नींद की कमी की समस्या अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) का कारण बन सकती है। शोधकर्ताओं (Researchers) ने पाया है कि वे किशोर जो बेकार नींद का अनुभव करते हैं, उनके आगे के ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)  पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। चाइल्ड साइकोलॉजी जर्नल (Journal of Child Psychology) में प्रकाशित शोध में किशोरों की नींद की गुणवत्ता व मात्रा का विश्लेषण किया गया व पाया कि बेकार नींद व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों में एक जरूरी संबंध है।

इस अध्ययन में 4790 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें पाया गया कि वे प्रतिभागी जिन्होंने अवसाद का अनुभव किया था, उनकी नींद की गुणवत्ता और मात्रा बेकार थी। वहीं चिंता के शिकार लोगों में केवल नींद की बेकार गुणवत्ता ही पाई गई। यह निष्कर्ष उन किशोरों की तुलना करते हुए निकला जिन्होंने किसी तरह की चिंता या अवसाद की शिकायत नहीं की थी। myUpchar से जुड़े ऐम्स के डाक्टर केएम नाधिर का बोलना है कि नींद की कमी मस्तिष्क की भावनाओं, सोच व सोच को संतुलित करने की क्षमता को बाधित करती है व इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

यूके में रीडिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ने बोला कि यह नया शोध यह दिखाने का एक बड़ा सबूत है कि नींद व किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक जरूरी संबंध है। अध्ययन में बताया गया है कि जिन युवाओं को अवसाद व चिंता का अनुभव होता है, वे अपनी किशोरावस्था के दौरान बेकार नींद का अनुभव करते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अवसाद का अनुभव करने वालों के बीच नींद की औसत मात्रा में अंतर है, जो अन्य प्रतिभागियों की तुलना में हर रात 30 मिनट बाद सोने जाते हैं।

शोध में स्पष्ट किया गया है कि किशोरों के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अध्ययन के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि किशोरों का वह समूह, जिसे नींद की कठिनाई नहीं थी, वह प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे की नींद लेते थे व हफ्ते के अंत में साढ़े नौ घंटे से अधिक सोते थे। वहीं वह समूह जो अवसादग्रस्त निकले, वे प्रतिदिन साढ़े सात घंटे से कम व हफ्ते के अंत पर सिर्फ नौ घंटे की नींद ले रहे थे। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक 14-17 वर्ष की आयु के किशोरों को आमतौर पर हर रात लगभग 8-10 घंटे की नींद की जरूरत होती है।

myUpchar से जुड़े एम्स के डाक्टर नबी वली का बोलना है कि सोने की अच्छी आदतें नींद की कठिनाई को दूर करने व गहरी नींद सोने में मदद कर सकती हैं। बेहतर होगा कि किशोर अपने हर दिन के सोने व जागने के समय को एक जैसा रखें। दिनभर सक्रिय रहें, ताकि रात में अच्छी नींद आए। सोने से पहले ज्यादा मात्रा में भोजन न करें व पेय पदार्थों से बचें। सोने से पहले मोबाइल, लेपटॉप पर समय न बिताएं, यह नींद बेकार करने की बड़ी वजह बनता है। बजाए इसके कुछ अच्छी आदतें अपनाएं जैसे सोने से पहले नहाना, किताबें पढ़ना या धीमी आवाज में संगीत सुनना।