बड़े काम की चीज़ है सीताफल, जाने इस के गुण

बड़े काम की चीज़ है सीताफल, जाने इस के गुण

सीताफल एक बड़ा ही स्‍वादिष्‍ट फल है लेकिन लोग इसके बारे में थोड़ा कम जानकारी रखते हैं। सीताफल अगस्त से नवम्बर के आस-पास आने वाला फल है। अगर आयुर्वेद की बात माने तो सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है।इसमें कैल्शिम और फाइबर जैसे न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते है जो पित्तशामक, तृषाशामक, उलटी बंद करने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, कफ एवं वीर्यवर्धक, मांस एवं रक्तवर्धक, बलवर्धक, वातदोषशामक एवं हृदय के लिए बहुत ही लाभदायी होता है।

# सीताफल में विटामिन बी6 होता है, जो दिमाग को तेज करता है और ब्रैन को फ्रैश रखता है। इस फल में मैग्नीशियम मौजूद होता है, जो हार्ट प्रॉबल्स को दूर करता है। इसलिए हार्ट के मरीजों को सीताफल का सेवन करना चाहिए।

# हाई या कम ब्लड प्रैशर के मरीजों को सीताफल का सेवन करना चाहिए। इसमें ब्लड प्रैशर को केट्रोल करना वाला तत्व पौटेशियम होता है। सीताफल में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो डाइजेशन के लिए सहायक माना जाता है।

# इस फल में मौजूद आयरन और कॉपर शरीर में खून की कमी को पूरा करता है।  सीताफल खाने से ब्लड शुगर का लेवन कम होता है, जिससे डायबिटीज की समस्या से बचा जा सकता है। 

# इसके बीज को बकरी के दूध के साथ पीसकर लेप करने से सिर के उड़े हुए बाल शीघ्र ही उग आते हैं और मस्तिष्क में ठंढक पहुंचती है। 


दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

हार्ट डिसीज भारत ही नहीं, दुनिया में मौतों के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। यह ऐसी बीमारी है, जिसके खतरे को अवेयरनेस से टाला जा सकता है या कम किया जा सकता है। वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर आज हम आपको इस बीमारी से जुड़े रिस्क फैक्टर्स, प्रिवेंशन और डायग्नोसिस से परिचित कराने जा रहे हैं।

हार्ट की एनाटॉमी

हार्ट एक मस्कुलर ऑर्गन है। यह एक पंप की तरह कार्य करता है। इसकी मदद से शरीर के सारे अंगों में ब्लड व ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।

भार- 7-15 आउंस (200-425 ग्राम)

साइज- बंद मुट्ठी के बराबर

पोजीशन

यह चेस्ट कैविटी के अंदर होता है जोकि ब्रेस्टबोन के बाई ओर होती है और पेरिकार्डियम से घिरी रहती है।कॉर्डियोवेस्कुलर सिस्टम

यह शरीर के अंदर नसों का एक जटिल नेटवर्क होता है। इसकी मदद से ब्लड को बॉडी का सभी ऑर्गन्स, टिश्यूज और सेल्स में ट्रांसपोर्ट होता है।


1,00,000 हार्टबीट्स प्रति दिन

2,000 गैलन (7571 लीटर) ब्लड प्रति दिन

यह चार चैंबर में डिवाइड होता है।

इलेक्ट्रिकल पेसमेकर सेल्स

इसकी मदद से हार्ट सिकुड़ता है। साथ ही ब्लड को पंप भी करता है।

पारस हॉस्पिटल, पंचकुला के कार्डिएक साइंस, चेयरमैन डॉ. हरिंदर के. बाली ने बताया कि, हाल के सालों में ऐसा देखा जा रहा है कि भारत में युवाओें में हार्ट की बीमारी ज्यादा हो रही है। भारत के लोगों में हार्ट की बीमारी पश्चिमी देशों के नागरिकों की तुलना में 10 या 15 साल पहले हो रही है। ऐसा पहले भी होता था लेकिन अब यह ज्यादा हो रहा है। चूंकि हाल ही ने एक जवां सेलिब्रिटी की हार्ट अटैक से मौत होने पर इस समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हार्ट की बीमारी को पहचानने के लिए काफ़ी टेस्ट होते हैं और हम उन लोगों को हार्ट की जांच कराने के लिए पहले सलाह देते थे जो 40 साल से ज्यादा होते थे लेकिन अब हम 35 साल से ज्यादा उम्र वालों को भी हार्ट की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं ख़ासकर उनको जिनके परिवार में किसी को हार्ट की समस्या हो चुकी हो। हमें अपने ब्लड टेस्ट की जांच कराके हार्ट के हेल्थ के बारे में पता करते रहना चाहिए। इसके अलावा हार्ट की कंप्रेहेसिव जांच भी करानी चाहिए।'


हार्ट डिसीज डायग्नोसिस के लिए कॉमन टेस्ट

ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)

बेहद सिंपल और पेनलेस टेस्ट है, जो बताता है कि आपका दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है और इसका रिदम (निरंतर या इररेगुलर) है।

होल्टर मॉनीटरिंग

एक पोर्टेबल डिवाइस के जरिए ईसीजी की निरंतरता को 24 से 72 घंटे में रिकॉर्ड किया जाता है। ईसीजी में हार्ट रिदम इररेगुलैरिटीज डिटेक्ट नहीं हो पाती तो इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

स्ट्रेस टेस्टिंग

इसके जरिए देखा जाता है कि हार्ट एबनॉर्मल रिदम या इस्कीमिया (हार्ट मसल्स तक ब्लड फ्लो न पहुंचना) के डेवलप होने से पहले कितना स्ट्रेस मैनेज कर सकता है।

इकोकार्डियोग्राफी (ईको)

इसका इस्तेमाल हार्ट के खराब ब्लड फ्लो एरिया की साउंड वेव्स को देखने के लिए किया जाता है।

चेस्ट एक्सरे

ऑर्गन्स और चेस्ट के अंदर के स्ट्रक्चर (हार्ट, लंग्स और ब्लड वेसेल्स) की पिक्चर ली जाती है। यह हार्ट फेल्योर के कारणों से अवगत कराती है।

एंजियोप्लास्टी

यह एक नॉनसर्जिकल प्रोसीजर है, जिसके जरिए सर्जन ब्लॉक या नैरो कोरोनरी आर्टिरीज को खोलते हैं।

सीएबीजी

यह सर्जरी का एक प्रकार है, जिसमें सर्जन ब्लॉक आर्टिरीज और वेन्स को हटाकर उन्हें सीधे बाईपास कर देता है।