अगर आप को भी दिनभर की थकान करती है परेशान तो अपनाये ये टिप्स

अगर आप को भी दिनभर की थकान करती है परेशान तो अपनाये ये टिप्स

दिन भर की भागदौड़ या शरीर के लगातार काम करने से आपको आराम नहीं मिल पाता है, और इससे आपको थकान महसूस होती है। लेकिन कई लोगों में थकान, तनाव व जिम्‍मेदारियों भी होता है। थकान को दूर भगाने के लिए कुछ लोग सिगरेट पी लेते है, और कुछ लोग चाय या कॉफी पी लेते है। और तो और कुछ लोग थकान के कारण होने वाले शरीर में दर्द के कारण पेनकिलर का सहारा लेते हैं। लेकिन इस तरह से थकान को दूर करने से सेहत को नुकसान हो सकता है। थकान को दूर करने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों को भी अपना सकती है।

# हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की ताकत होती है, जिसे हमारे शरीर की रोगप्रतरोधक क्षमता भी कहा जाता है। इसके बल पर हमारा शरीर बगैर किसी बाहरी सहायता के बीमारियों से लड़ सकता है। पर जब यही ताकत कमज़ोर हो जाती है, तो व्यक्ति बीमार हो जाता है और उसे दवाइयाँ लेने की ज़रुरत पड़ती है। इसलिए रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए पौष्टिक भोजन का सेवन करना लाभदायी माना जाता है।

# अगर आप थकान से लड़ने के लिए अपने शरीर को मजबूत बनाना चाहते हैं तो नियमित रूप से नाश्‍ता करना कभी न भूलें। सुबह का किया हुआ नाश्‍ता आपके शरीर को पूरे दिन एनर्जी देता है। ऐसा नाश्ता करें, जिसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक और शूगर व वसा की मात्रा कम हो। नाश्‍ते में फल, स्‍प्राउट आदि को शामिल करें।

# हर्बल ड्रिंक जैसे ग्रीन टी, आंवला या एलोवेरा जूस को पीने से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और शरीर को थकान से लड़ने में मदद मिलती है। साथ ही नियमित इसे पीने से वजन कंट्रोल रहता है और मसल्‍स पेन में भी आराम मिलता है।

# हमारे शरीर की कार्य प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यक्ति को भरपूर नींद लेना ज़रूरी होता है। पूरी नींद लेने से शरीर और मस्तिष्क दोनों को आराम मिलता है और काम करने की ऊर्जा बनी रहती है।

# कहते हैं ना, हमारे शरीर को चलनेवाला हमारा मस्तिष्क है। सोचिए, अगर तनाव की वजह से इसके कामकाज पर असर हो, तो क्या हमारा शरीर सुचारू रूप से चल पाएगा? नहीं ना , तो सबसे पहले अपने मस्तिष्क के स्वास्थ्य का ख्याल करें।

# रोज़ाना प्राणायाम व मेडिटेशन करें। इससे हमारे मस्तिष्क की नसों को आराम मिलता है और मस्तिष्क में ऑक्सीजन की पूर्ती होती है।

# थकान दूर करने में पानी की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। शरीर में पानी की कमी होने से ज्यादा थकान महसूस होती है। इसलिए पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी की बोतल से सिंकाई करने से प्रभावित अंग के दर्द में आराम मिलेगा और थकान भी दूर होती है।


दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने वाले कुछ कॉमन और पेनलेस टेस्ट

हार्ट डिसीज भारत ही नहीं, दुनिया में मौतों के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। यह ऐसी बीमारी है, जिसके खतरे को अवेयरनेस से टाला जा सकता है या कम किया जा सकता है। वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर आज हम आपको इस बीमारी से जुड़े रिस्क फैक्टर्स, प्रिवेंशन और डायग्नोसिस से परिचित कराने जा रहे हैं।

हार्ट की एनाटॉमी

हार्ट एक मस्कुलर ऑर्गन है। यह एक पंप की तरह कार्य करता है। इसकी मदद से शरीर के सारे अंगों में ब्लड व ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।

भार- 7-15 आउंस (200-425 ग्राम)

साइज- बंद मुट्ठी के बराबर

पोजीशन

यह चेस्ट कैविटी के अंदर होता है जोकि ब्रेस्टबोन के बाई ओर होती है और पेरिकार्डियम से घिरी रहती है।कॉर्डियोवेस्कुलर सिस्टम

यह शरीर के अंदर नसों का एक जटिल नेटवर्क होता है। इसकी मदद से ब्लड को बॉडी का सभी ऑर्गन्स, टिश्यूज और सेल्स में ट्रांसपोर्ट होता है।


1,00,000 हार्टबीट्स प्रति दिन

2,000 गैलन (7571 लीटर) ब्लड प्रति दिन

यह चार चैंबर में डिवाइड होता है।

इलेक्ट्रिकल पेसमेकर सेल्स

इसकी मदद से हार्ट सिकुड़ता है। साथ ही ब्लड को पंप भी करता है।

पारस हॉस्पिटल, पंचकुला के कार्डिएक साइंस, चेयरमैन डॉ. हरिंदर के. बाली ने बताया कि, हाल के सालों में ऐसा देखा जा रहा है कि भारत में युवाओें में हार्ट की बीमारी ज्यादा हो रही है। भारत के लोगों में हार्ट की बीमारी पश्चिमी देशों के नागरिकों की तुलना में 10 या 15 साल पहले हो रही है। ऐसा पहले भी होता था लेकिन अब यह ज्यादा हो रहा है। चूंकि हाल ही ने एक जवां सेलिब्रिटी की हार्ट अटैक से मौत होने पर इस समस्या के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। हार्ट की बीमारी को पहचानने के लिए काफ़ी टेस्ट होते हैं और हम उन लोगों को हार्ट की जांच कराने के लिए पहले सलाह देते थे जो 40 साल से ज्यादा होते थे लेकिन अब हम 35 साल से ज्यादा उम्र वालों को भी हार्ट की जांच कराने की सलाह दे रहे हैं ख़ासकर उनको जिनके परिवार में किसी को हार्ट की समस्या हो चुकी हो। हमें अपने ब्लड टेस्ट की जांच कराके हार्ट के हेल्थ के बारे में पता करते रहना चाहिए। इसके अलावा हार्ट की कंप्रेहेसिव जांच भी करानी चाहिए।'


हार्ट डिसीज डायग्नोसिस के लिए कॉमन टेस्ट

ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)

बेहद सिंपल और पेनलेस टेस्ट है, जो बताता है कि आपका दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है और इसका रिदम (निरंतर या इररेगुलर) है।

होल्टर मॉनीटरिंग

एक पोर्टेबल डिवाइस के जरिए ईसीजी की निरंतरता को 24 से 72 घंटे में रिकॉर्ड किया जाता है। ईसीजी में हार्ट रिदम इररेगुलैरिटीज डिटेक्ट नहीं हो पाती तो इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

स्ट्रेस टेस्टिंग

इसके जरिए देखा जाता है कि हार्ट एबनॉर्मल रिदम या इस्कीमिया (हार्ट मसल्स तक ब्लड फ्लो न पहुंचना) के डेवलप होने से पहले कितना स्ट्रेस मैनेज कर सकता है।

इकोकार्डियोग्राफी (ईको)

इसका इस्तेमाल हार्ट के खराब ब्लड फ्लो एरिया की साउंड वेव्स को देखने के लिए किया जाता है।

चेस्ट एक्सरे

ऑर्गन्स और चेस्ट के अंदर के स्ट्रक्चर (हार्ट, लंग्स और ब्लड वेसेल्स) की पिक्चर ली जाती है। यह हार्ट फेल्योर के कारणों से अवगत कराती है।

एंजियोप्लास्टी

यह एक नॉनसर्जिकल प्रोसीजर है, जिसके जरिए सर्जन ब्लॉक या नैरो कोरोनरी आर्टिरीज को खोलते हैं।

सीएबीजी

यह सर्जरी का एक प्रकार है, जिसमें सर्जन ब्लॉक आर्टिरीज और वेन्स को हटाकर उन्हें सीधे बाईपास कर देता है।