कोरोना वायरस से ज्यादा टीबी व हैजा मार सकती है हमको

कोरोना वायरस से ज्यादा टीबी व हैजा मार सकती है हमको

नयी दिल्ली: आपको लग रहा होगा कि देश में सबसे बड़ा खतरा कोरोना वायरस है। लॉकडाउन होने के देश में हजारों लोगों की जान बच जाएगी। लेकिन आपका सोचना गलत भी होने कि सम्भावना है। दरअसल अब कई वैज्ञानिक दावा करने लगे हैं कि कोरोना वायरस की बजाए टीबी व हैजा से मरने वालों की संख्या देश में कहीं ज्यादा होगी।

देश में टीबी व हैजा के हैं ज्यादा मामले
टीबी (तपेदिक) व हैजा जैसी बीमारियों को नजरअंदाज करने से कोविड-19 के मद्देनजर लागू लॉकडाउन से जिंदगियां बचाने की कोशिशें बेअसर साबित होंगी। जन स्वास्थ्य क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने बोला है कि जितनी जिंदगियां इन प्रयासों से बचाई गई, उतनी ही जान टीबी व हैजे की वजह से जा सकती हैं।

हैदराबाद के भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर वी रमण धारा ने बोला कि तपेदिक, हैजा व कुपोषण जैसी गरीबी संबंधी बीमारियों से जान जाने की घटनाओं पर विचार करना ही होगा जिनके 'लॉकडाउन जारी रहने' के दौरान नजरअंदाज किए जाने की संभावना है। उन्होंने बोला कि इन बीमारियों से होने वाली मौतें संभवत: लॉकडाउन के चलते बची जिंदगियों की उपलब्धि को बेअसर कर देंगी।

उन्होंने एक इंटरव्यू में बोला कि हर किसी को इस महामारी को मानवों द्वारा पर्यवारण को पहुंचाए गए बेहिसाब नुकसान को प्रकृति की ओर से दी गई रिएक्शन के रूप में देखना चाहिए जिसके कारण जानवरों के प्राकृतिक वास छिन गए व परिणामस्वरूप इंसानों तथा जानवरों के बीच के संबंध बेकार हो गए।  

भारत में कोविड-19 स्थिति के अपने आकलन में धारा ने पाया कि शनिवार शाम तक आए संक्रमण के 1,25,000 मुद्दे स्पष्ट रूप से मई के अंत तक अनुमानित 1,00,000 मामलों से ज्यादा हो गए हैं व इनका लगातार बढ़ना जारी है। मामलों के हिसाब से मौत दर भले ही धीरे-धीरे कम हो रही हो लेकिन कुल मौत दर अधिक महत्त्वपूर्ण है लेकिन उनका बोलना है कि होने कि सम्भावना है ठीक आंकड़ें सामने नहीं आ रहे हों क्योंकि मृत्यु के कुछ मामलों में कोविड-19 की जाँच न की गई हो इसकी आसार है।