युवाओं में इन कारणों से हो रही हैं आर्थराइटिस की परेशानी

युवाओं में इन कारणों से हो रही हैं आर्थराइटिस की परेशानी

आर्थराइटिस शरीर के 15 मुख्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है. हड्डियों में ऑस्टियोपोरेसिस होता है. हड्डियां निर्बल होती हैं. फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है. मसल्स निर्बल होता है. सेल्स डैमेज होता है. आंखों में रूखापन, दर्द, लालपन व धुंधला, फेफड़ों के फ्लूड जमा होना-निमोनिया, दिल में सूजन व फ्लूड भरना, हाथ की कलाइयों पर गांठें बनना, खून की कमी होना, खून की नलियों में जकडऩ से हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना बढऩा आदि समस्याएं होती हैं.
स्टेरॉइड्स व जंक फूड वजह
भारत में आर्थराइटिस के मरीजों की संख्या करीब 15 करोड़ है. इसके करीब 100 प्रकार हैं लेकिन इनमें मुख्य रूप आस्ट्रियो आर्थराइटिस, रूमेटाइड व गाऊट आर्थराइटिस की समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है. युवाओं में आर्थराइटिस की समस्या स्टेरॉइड्स, कृत्रिम सप्लीमेंट व जंक फूड के कारण अधिक हो रही है. इनसे जोड़ों में ब्लड सर्कुलेशन कम होने लगता है. जोड़ सूखने लगते, आवाजें आती व डेड हो जाते हैं.
खानपान
मौसमी फल जिनमें सिट्रस एसिड होता है जैसे नींबू, संतरा, मौसमी, चकोतरा आदि खाने चाहिए. ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स वाला पॉलीफिनाल्स होता है. इससे गठिया का प्रभाव घटता है. प्रातः काल नाश्ते में दलिया खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है. लहसुन की 5-6 कलिया प्रतिदिन खाने से गठिया में होने वाली सूजन कम होती है. आर्थराइटिस के रोगी में खून की कमी होती है इसलिए पालक, चुकंदर आदि आयरन रिच डाइट लेनी चाहिए.
ऐसे जमा होते हैं टॉक्सिन : डेयरी उत्पाद, जंक या फास्ट फूड, फ्राइड और रिफाइंड फूड, मांस-मछली व अल्कोहल नुकसान पहुंचाते हैं. इनसे पाचन बेकार होता जिससे टॉक्सिक तत्व कोलन (बड़ी आंत) में सड़ते व फिर खून के जरिए शरीर में फैल जाते हैं. ये विषैले तत्व जोड़ों में जमा होते हैं. नियमित अभ्यास से ये टॉक्सिन जमा नहीं होते.