कोरोना वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो जाने वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया

कोरोना वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो जाने वैक्सीनेशन की पूरी प्रक्रिया

कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया को एक साल तक हलकान किया है, अब इस पर काबू पाने का समय आ गया है। देश में जल्द ही वैक्सीनेशन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। कोरोना का वैक्सीन इस वायरस पर काबू पाने का एक मात्र बेहतर तरीका है। इस वैक्सीन को आप भी लगवाने जा रहे हैं तो आपको किस-किस प्रक्रिया से गुजरना होगा उसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। टीकाकरण अभियान में आपको किन-किन कठिनाईयों का सामना करना होगा उसके बारे में हम आपको पूरी जानकारी देते हैं।

कोविन ऐप की जानकारी रखना जरूरी:

कोरोना का टीका लगाने जा रहे हैं तो कोविन एप क्या है इसके बारे में जरूर जानें। कोविन ऐप ऐसा ऐप है जिसे भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय ने मिलकर बनाया है। इस ऐप के माध्यम से ही वैक्सीन की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। टीका लगाने की पूरी प्रक्रिया को इस ऐप के माध्यम से ही पूरा किया जाएगा। इस ऐप में पूरी प्रक्रिया की जानकारी रखी जाएगी। टीका लगवाने के रजिस्ट्रेशन से लेकर टीका लगने तक की सारी क्रिया इस ऐस के माध्यम से की जाएगी। सरकार की ये सारी तैयारी इसलिए है ताकि वैक्सीनेशन प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की समस्या न खड़ी हो। आप इस कोविन ऐप को डिजिटल प्लेटफॉर्म से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

वैक्सीन लेना है तो खुद को कराएं रजिस्टर: 

कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले हर इंसान को सबसे पहले खुद को ऐप के माध्यम से रजिस्टर कराना होगा। उसके बाद व्यक्ति के मोबाइल पर एक मैसेज आएगा जिसमें उसे सूचित किया जाएगा कि किस सेंटर पर जाकर उसे टीका लगवाना है। टीका लगवाने वाले हर एक व्यक्ति को एक यूनिक आईडी दी जाएगी और साथ ही इस कोड को सरकार के डिजी लॉकर ऐप में सुरक्षित रखा जाएगा।

वैक्सीनेशन प्रक्रिया:

जिस सेंटर पर आपको वैक्सीन लगवानी है वहां जब आप पहुंचेगे तो सबसे पहले आपकी थर्मल स्कैनिंग की जाएगी और फिर आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा। इसके बाद उसका मिलान आवेदन की सूची से होगा और मिलान के बाद आपको फोन पर आया मैसेज भी दिखाना होगा। इसके बाद दूसरी टेबल पर जाकर अपना आईडी प्रूफ (जैसे- आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) दिखाना होगा। आपकी पहचान का मिलान होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

वैक्सीन कैसे और कितनी देर में लगेगी:

रजिस्ट्रेशन और पहचान का मिलान होने के बाद सबसे आखिरी प्रक्रिया है टीका लगवाने की। सबसे अंत में आपको तीसरी टेबल यानी वहां भेजा जाएगा जहां पर वैक्सीन लगेगी। वैक्सीन लगाने में पांच से सात मिनट का समय लगता है। इसके बाद जब वैक्सीन लग जाएगी तो आधे घंटे तक आपको वहीं देखरेख में रखा जाएगा। इसके बाद जब आप सामान्य हो जाते हैं तब आपको घर भेज दिया जाएगा। 


बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी से हो सकती हैं ये दिक्कतें

बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी से हो सकती हैं ये दिक्कतें

सेहत के लिए जानना जरूरी है कि कब, क्या और कितना खाना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान यह और जरूरी होता है, क्योंकि आपके संग बच्चे की सेहत का सवाल भी होता है। हालांकि, भारत में पोषण के कुछ फैक्ट इसकी दुखद तस्वीर पेश करते हैं।

भारत में 26.8 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो जाती है। इसकी वजह से 22.9 प्रतिशत महिलाएं प्रेग्नेंसी के समय कम वजन की होती हैं। यही कारण है कि भारत में 58 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं।

गर्भावस्था के दौरान पोषण इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि आपके शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं। बच्चे की ग्रोथ के लिए यह काफी अहम भी है। इस दौरान फीटल ग्रोथ रिस्ट्रिक्शन (एफजीआर) का जोखिम काफी होता है। दुनियाभर में इसकी वजह से एक-चौथाई बच्चे काल के गाल में समा जाते हैं। खराब पोषण की वजह से बच्चे समुचित वजन हासिल नहीं कर पाते हैं। वहीं, कुछ मामलों में इसकी वजह से बच्चों का कॉगनिटिव विकास नहीं हो पाता है।

वयस्क रोग की भ्रूण उत्पत्ति

ऐसा स्वीकार किया जा चुका है कि गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल है। कोरोनरी हार्ट डिजीज, डाइबिटीज मेलिटस और हाइपरटेंशन फेटल लाइफ न्यूट्रिशन के बाई-प्रोडक्ट्स होते हैं। फीटल लाइफ के समय महिलाओं के भूखे रहने से इंसुलिन रजिस्टेंस सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में गर्भावस्था को दौरान बेहतर न्यूट्रिशन जरूरी है, क्योंकि इससे बाल मृत्यु दर, पैटर्न बर्थ, कम वजन के बच्चे पैदा होने जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता है।

मां के समुचित पोषण के ये हैं असर-

-मां के माइक्रोन्यूट्रिएंट स्तर में सुधार

- कम वजन के बच्चों में कमी

-पोस्ट डिलीवरी ब्लीडिंग एमएमआर में कमी

-मातृत्व एनीमिया में कमी, प्रीमैच्योर बेबी में कमी

-गर्भपात में कमी, दिमाग के नुकसान में कमी

मातृत्व पोषण को ऐसे सुधारें

स्वस्थ खान-पान के लिए काउंसिलिंग करें। बैलेंस्ड एनर्जी और प्रोटीन डाइटरी सप्लीमेंट्स लें। फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (400 माइक्रोग्राम) पहले ट्राइमिस्टर में लें। आयरन और फोलिक एसिड दूसरी तिमाही में रोजाना लें। कैल्शियम सप्लीमेंट्स दूसरी तिमाही में रोजाना लें। कैफीन का सेवन कम करें। पास्चुराइज्ड दूध ही लें। बिना पका और कम पका खाना न लें। बिना पका मीट भी न लें। किसी भी फल-सब्जी को धोकर खाएं। खाना खाने से पहले हाथ धोएं। बागवानी करते समय दास्ताने पहनें और हाथों को अच्छी तरह धोएं।

गर्भावस्था में डाइट

-प्रेग्नेंसी में अतिरिक्त ऊर्जा के रूप में 350 किलो कैलोरी की आवश्यकता होती है

-दूसरी और तीसरी तिमाही में पोषक स्नैक्स जरूरी है

-कम वजन वाली प्रेग्नेंट महिलाएं एक अतिरिक्त स्नैक्स लें। अधिक वजह वाली महिलाएं पूरे दिन में छोटे-छोटे मील (खाना) लें।

-कम पोषण वाला खाना खाने की वजह से महिलाओं को चक्कर आना, मितली आना, भूख कम लगना जैसे समस्याएं होती हैं।


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