गूगल ने मशहूर कवि व गीतकार की 101वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी

गूगल ने मशहूर कवि व गीतकार की 101वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी

कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों', 'ये संसार ये महफिल मेरे कार्य की नहीं' लिखने वाले कैफी आजमी (Kaifi Azmi) को गूगल ने आज खास अंदाज में याद किया है। गूगल ने मशहूर कवि व गीतकार कैफी आजमी की 101वीं जयंती पर डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कविताओं के अतिरिक्त हिन्दी फिल्मों के गाने व स्क्रीनप्ले भी लिखे।

कैफी आजमी का जन्म 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। बचपन से ही उन्हें लिखने-पढ़ने का बहुत ज्यादा शौक था। उन्होंने 11 वर्ष की आयु में पहली गजल लिखी थी। कैफी आजमी की बेटी शबाना आजमी भी बॉलीवुड की प्रसिद्ध एक्ट्रेस हैं। उनका निधन 10 मई 2002 को मुंबई में हुआ था।

जानें उनके ज़िंदगी की कुछ खास बातें
1.सादगीभरा ज़िंदगी जीने वाले कैफी बहुत ज्यादा हंसमुख स्वभाव के थे। शुरुआती दौर में उन्होंने मुंबई में उर्दू जर्नल 'मजदूर मोहल्ला' का संपादन किया। यहीं उनकी मुलाकात शौकत से हुई। कुछ समय बाद उन्होंने शौकत को जीवनसंगीनी बनाया।

2.कैफी के लेखन से संपन्न परिवार की शौकत बहुत ज्यादा प्रभावित थीं। उनके दो बच्चे हुए, शबाना व बाबा। शबाना हिन्दी फिल्मों की प्रसिद्ध एक्ट्रेस हैं।

3.ब्रेनहैमरेज से लड़ते हुए उन्हें ज़िंदगी का नया लक्ष्य मिला। उन्होंने अपने गांव में स्कूल, अस्पताल व सड़क बनवाने में मदद की।

4.उत्तरप्रदेश सरकार ने सुल्तानपुर से फूलपुर सड़क को कैफी मार्ग घोषित किया है।

5.कैफी के 5 सुपरहिट गाने

6.कैफी को पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया था। इसके अतिरिक्त 'आवारा सिज्दे' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया है।