इस समय डेट व इक्विटी में निवेश करना रहेगा फायदेमंद, मंदी का कारण ही आपको दिलाएगा बेहतर रिटर्न

इस समय डेट व इक्विटी में निवेश करना रहेगा फायदेमंद, मंदी का कारण ही आपको दिलाएगा बेहतर रिटर्न

फिलहाल घरेलू व वैश्विक मार्केट कोरोना की महामारी व इसके प्रकोप से जूझ रहे हैं. हिंदुस्तान में देखें तो, वार्षिक आधार पर निफ्टी में 36 प्रतिशत व बीएसई सेंसेक्स में 35.7 फीसदी (23 मार्च, 2020 तक) की गिरावट देखी गई है. किसी को नहीं पता कि कोरोनावायरस का असर कब तक कम होगा. इससे निवेशकों में भय है. लेकिन आप ऐसे समय में भी ठीक तरह से निवेश करके अच्छा रिटर्न पा सकते हैं.

मंदी का कारण ही आपको दिलाएगा बेहतर रिटर्न
ऐतिहासिक रूप से, यह देखा गया है कि कोई भी वैश्विक घटना जिसके कारण मार्केट में मंदी आई है, उनसे आगे चलकर सुन्दर निवेश के मौका साबित हुए हैं. ऐसे समय में निवेश के लिए सकारात्मक नजरिया रखना महत्वपूर्ण है. इससे भी अधिक जरूरी बात यह है कि इस तरह के निवेश में अगर बने रहा जाए जो आगे चलकर मार्केट की मौजूदा अस्थिरता का फायदा उठा सकते हैं.

निवेश करना न करें बंद
निवेशकों को पहले का निवेश बनाए रखना चाहिए. अक्सर यह देखा जाता है कि निवेशक इस तरह की स्थिति में पैसे को निकाल लेते हैं. लेकिन भय व लालच के आधार पर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए. सच में, वर्तमान मार्केट की स्थिति निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड के वर्तमान एसआईपी में टॉप अप करना चाहिए. इससे आपको कम मूल्य पर ज्यादा यूनिट मिलेगा. हालांकि यह कोई नहीं जानता है कि मार्केट का माहौल कब तक सुधरेगा, पर सलाह यही है कि निवेश को फैलाया जाएगा. इसके लिए निवेशकों को म्यूचुअल फंड के असेट अलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज कटेगरी का रास्ता अपनाना चाहिए. इसके अलावा, आईसीआईसीआई डायरेक्ट के एक विश्लेषण से पता चलता है कि नौ में से छह बार जब भी मार्केट में 10 फीसदी से ज्यादा करेक्शन हुआ था तो अगले दो महीने में ही मार्केट संभल गए थे.

बाजार मूल्यांकन
इक्विटी वैल्यूएशन इंडेक्स इस बात पर प्रकाश डालता है कि इक्विटी में निवेश के लिए सुरक्षा के अच्छे मार्जिन के साथ इक्विटी सुन्दर मूल्यांकन पर उपलब्ध है. इस मॉडल के अनुसार आगे इक्विटीज में आक्रामक रूप से निवेश करना चाहिए. वीसीटीएस (वैल्यूएशन, साइकिल, ट्रिगर व सेंटिमेंट) फ्रेमवर्क से यह पता चलता है कि मूल्यांकन सुन्दर हैं व हम इक्विटी के ईर्द गिर्द सेंटिमेंटस के साथ बिजनेस साइकल के कम से मध्य (low to mid) चरण में हैं, जो एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में निगेटिव है. इन्हें ध्यान में रखते हुए हम तो वैसे निवेश पोर्टफोलियो में इक्विटी जोड़ने की सलाह देते हैं.

परिसंपत्तियों बंटवारे (एसेट एलोकेशन) का पालन करें
पोर्टफोलियो प्रदर्शन के निर्धारकों पर गैरी ब्रिंस्टन, ब्रायन डी सिंगर व गिल्बर्ट एल बीबोवर द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया कि परिसंपत्ति आवंटन पोर्टफोलियो प्रदर्शन का एक जरूरी निर्णय है जो अगर आंकड़ों के आधार पर बोला जाए तो 91.5 फीसदी के हिसाब से है. इसके बाद सुरक्षा चयन, मार्केट का समय व कुछ अन्य कारकों का सहयोग महज 8.5 फीसदी रहा. इसीलिए, निवेशकों के रूप में निवेश करते समय अगर परिसंपत्तियों के वर्ग में है तो उसे सबसे अधिक सचेत होना चाहिए.
इसे ठीक करने के लिए सबसे अच्छा नजरिया डायनॉमिक असेट अलोकेशन स्कीम्स हैं, जिन्हें विभिन्न फंड हाउस पेश करते रहते हैं. यहां बाजार वैल्यूएशन के आधार पर इक्विटी व डेट में आवंटन भिन्न-भिन्न रखा जाएगा. उदाहरण के लिए ऐसे समय में जब इक्विटी मूल्यांकन महंगा है, इस तरह का पोर्टफोलियो डेट में आवंटन बढ़ा या घटा देगा. इस तरह की व्यवस्था एक निवेशक को कम पर खरीदने व उच्च पर बेचने में मदद करती है.

डेट को नजरअंदाज मत कीजिए
ऋण (Debt) एक परिसंपत्ति वर्ग है जो अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. वर्तमान मार्केट में, हमारा मानना है कि क्रेडिट फंड उनके सुन्दर मूल्यांकन को देखते हुए निवेश के लिए एक दिलचस्प मौका पेश करते हैं. सख्त प्रक्रिया उन्मुख निवेश दृष्टिकोण का पालन करने वाले फंड हाउसों का विकल्प चुनें जो परेशानी के दौर से गुजर रहे ऋण पत्रों (Debt Papers) से दूर रहने में सफल रहे हैं.