अब Co-Operative बैंकों पर भी होगी RBI की नजर, बैंक के दिवालिया होने पर जाने कितनी मिलेगी धनराशी

अब Co-Operative  बैंकों पर भी होगी RBI की नजर, बैंक के दिवालिया होने पर जाने कितनी मिलेगी धनराशी

नई दिल्ली: अभी तक सभी सरकारी व प्राइवेट बैंकों की निगरानी की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक की है. वहीं अब सहकारी बैंक (Co-Operative Banks) भी भारतीय रिजर्व बैंक के तहत आ सकते हैं. इसी सिलसिले में बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट में संशोधन से संबंधित विधेयक (Banking Regulation Amendment Bill) को लोकसभा में पेश किया गया. माना जा रहा है कि ये जून में लाए गए अध्यादेश की स्थान लेगा. एक्ट में परिवर्तन का मकसद बैंक में जमा लोगों के पैसों के हितों की रक्षा करना है. नए विधेयक से करीब देश भर के करीब 1540 सहकारी बैंक RBI के सीधे रेगुलेशन में आ जाएंगे.

बताया जाता है कि अगर कोई बैंक दिवालिया हो जाता है तो उसके जमाकर्ताओं को आरबीआई (RBI) की सब्सिडियरी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के मुताबिक 5 लाख रुपए मिलेंगे. चाहे उनके खाते में पहले कितनी भी रकम हो. पहले चल रहे नियम के मुताबिक अधिकतम सीमा 1 लाख रुपए थी. जिसे बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी 2020 को पेश किए बजट में इसे बढ़ा दिया था. DICGC एक्ट, 1961 की धारा 16 (1) के नियमों के मुताबिक बैंक के डिफॉल्टर घोषित होने पर उसमें उपस्थित खाता धारकों को जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा मिलेगा.

अगर किसी खाता धारक ने एक ही बैंक के कई भिन्न-भिन्न ब्रांच में एकाउंट खोल रखा है व ऐसी स्थिति में वो बैंक डूबता है तो आपके सारे ब्रांच के एकाउंट को मिलाकर पैसा जोड़ा जाएगा. अगर इन सबको मिलाकर आपके 5 लाख रुपए से ज्यादा होते हैं तब भी आपको सारे पैसे वापस नहीं मिलेंगे. आपको महज 5 लाख रुपए ही बतौर बीमा राशि दी जाएगी. इसके अतिरिक्त अगर आपकी एफडी भी है तो बैंक के डूब जाने के बाद आपको एक लाख रुपए दिए जाएंगे. यह रकम किस तरह मिलेगी, यह गाइडलाइंस DICGC तय करेगा.