क्या महाशिवरात्रि के दिन हिंदुस्तान में 1.25 करोड़ लीटर दूध पूजा के नाम पर होता हैं बर्बाद?

क्या महाशिवरात्रि के दिन हिंदुस्तान में 1.25 करोड़ लीटर दूध पूजा के नाम पर होता हैं बर्बाद?

नई दिल्ली: उत्तर हिंदुस्तान से लेकर दक्षिण हिंदुस्तान तक सारे देश में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है. इससे पहले देश में कुपोषण के कुछ आंकड़ों पर नजर डाल लेते हैं. हिंदुस्तान में 5 वर्ष से कम आयु के कुपोषित बच्चे 35 प्रतिशत हैं, जबकि यूनिसेफ का यह आंकड़ा 50 प्रतिशत है. एसीएफ इंडिया व फाइट हंगर फाउंडेशन के अनुसार हर वर्ष 5 से 10 लाख बच्चे कुपोषण से मर जाते हैं. वहीं दूसरी ओर महाशिवरात्रि के दिन एक करोड़ लीटा से ज्यादा दूध बर्बाद हो जाता है. 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का दूध नालियों के रास्ते गटर में बह जाता है. हम यहां किसी की आस्था को चोट करने का कोशिश नहीं कर रहे हैं. बस यह दिखाने या समझाने का कोशिश कर रहे हैं कि जिस देश में लोगों के पास पीने के लिए दूध ना हो, वहां पर दूध की इस तरह की बर्बादी ठीक है?

एक चौथाई हिंदू तो जाते ही होंगे शिव मंदिर
मौजूदा समय में देश की कुल आबादी 135 करोड़ है. जिनमें से करीब 100 करोड़ हिंदु आस्था को मानने वाले हैं. अब कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है कि देश में प्रतिदिन कितने हिंदु शिव मंदिरों में जाते हैं, लेकिन यह तय है कि महाशिवरात्रि के मौके पर शिव मंदिरों में जाने वाले लोगों की संख्या आम दिनों से ज्यादा होती है. अगर कम से कम भी मानें तो इस मौके पर एक चौथाई यानी 25 करोड़ लोग शिव मंदिर तो जाते ही होंगे. यह कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन इस मौके के हिसाब से यह अनुमानित आंकड़ा मान सकते हैं.

इतना चढ़ जाता होगा शिव मंदिरों में दूध
महाशिवरात्रि ही नहीं आम दिनों में भी भगवान शिव की पूजा करने वाले लोग शिवलिंग पर दूध अर्पित करते है, माना जाता है कि इस दिन ज्यादा लोग शिव मंदिरों में जाते हैं तो इन 25 करोड़ लोगों के पास औसतन 50 ग्राम दूध तो होगा ही. यानी देश के 1.25 करोड़ लीटर महाशिवरात्रि के मौके पर चढ़ जाता होगा. अगर इसकी मूल्य की बात करें तो हाल ही में अमूल, व मदर डेयरी की ओर से कीमतें बढ़ाई गई थी. ऐसे में टोंड दूध की मूल्य को आधार मानें तो 45 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से अनुमानित 56 करोड़ रुपए का दूध मंदिर की नालियों के रास्ते गटर में जाता होगा.

करीब 21 प्रतिशत कुपोषण के शिकार है बच्चे
अब जरा देश के उस हिस्से को छूने की प्रयास करते हैं जिसे देश की सरकार कभी गुजरात तो कभी दिल्ली ढंकने का कोशिश करती है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 की रिपोर्ट के अनुसार बाल मौत दर व कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या 20.8 प्रतिशत है. देश में 6 महीने से करीब 2 वर्ष तक के बीच के करीब 9.6 प्रतिशत बच्चों को ही न्यूनतम आहार मिलता है. न्यूनतम आहार ना मिल पाने के कारण हिंदुस्तान में 35 प्रतिशत बच्चे छोटे कद के हैं व 17 प्रतिशत बच्चे निर्बल हैं.

देश में मिल्क इकोनॉमी
भारत संसार का दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में वर्ष में 187.7 मिलियन टन होता है. देश में प्रति आदमी दूध उपलब्धता 394 ग्राम है. अनुमान लगाया है कि 2025 तक यह उपलब्धता 500 ग्राम से होने के संभावना है. वहीं देश में दूध के कारोबार की बात करें तो सालाना 5 लाख करोड़ रुपए का कारोबार है. जिनमें सवा लाख करोड़ रुपए के आसपास का कारोबार संगठित क्षेत्र का है. बाकी कारोबार अंगठित क्षेत्र का है.