इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को कीमत न बढ़ने से हुआ 1992 करोड़ रुपये का ‘महा नुकसान’

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को कीमत न बढ़ने से हुआ 1992 करोड़ रुपये का ‘महा नुकसान’

IOCL Loss:  पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर रोक के कारण भारतीय ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) को भारी हानि हुआ है. IOC ने जून तिमाही में 1,992 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया. कच्चे ऑयल के मूल्य बढ़ने के कारण कम्पनी का रिफाइनिंग मार्जिन समाप्त हो गया. कच्चे माल की लागत में वृद्धि के बावजूद पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों को यथावत रखने के कारण कंपनी को घाटा हुआ है. 

पिछले दो वर्ष में पहली बार घाटा

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि अप्रैल-जून में IOCL 1,992.53 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ. जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में 5,941.37 करोड़ रुपये के शुद्ध फायदा में थी. ऑयल कंपनी को पिछले दो वर्ष में पहली बार किसी तिमाही में घाटा हुआ है. कंपनी को वित्त साल 2019-20 की आखिरी तिमाही में माल भंडार पर हुए हानि के कारण शुद्ध घाटा हुआ था. 

114 दिनों से नहीं बढ़ी कीमतें

खुदरा ईंधन विक्रेता IOC, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने कच्चे ऑयल (ईंधन बनाने के लिये कच्चा माल) के रेट में उछाल के बावजूद तिमाही के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में परिवर्तन नहीं किया है. इससे इन कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन पर असर पड़ा है. परिचालन से इसका राजस्व अप्रैल-जून में 1.55 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 2.51 ट्रिलियन रुपये हो गया, जिसका मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऑयल की कीमतें अधिक थीं.

हर लीटर पेट्रोल पर 14 रूपये का घाटा

भारत में कच्चे ऑयल का आयात औसतन 109 अमेरिकी $ प्रति बैरल था, लेकिन खुदरा पंप की दरें लगभग 85-86 $ प्रति बैरल के हिसाब से थीं. कंपनियों को पेट्रोल और डीजल पर 12-14 रुपये प्रति लीटर का हानि हो रहा है.  

UP चुनाव से पहले भी नहीं बढ़े थे दाम

IOC, BPCL और HPCL ने यूपी जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले दरों में संशोधन करना बंद कर दिया. तब 137-दिन  कीमतें नहीं बढ़ी थीं और अप्रैल की आरंभ में फ्रीज का एक और दौर प्रारम्भ होने से पहले कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई.