जीएसटीआर-9 व 9सी भरने की डेट बढ़ी

जीएसटीआर-9 व 9सी भरने की डेट बढ़ी

वित्त साल 2018-19 के लिए वार्षिक रिटर्न (जीएसटीआर-9) व मिलान विवरण (जीएसटीआर 9सी) भरने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दी गई है. वित्त मंत्रालय ने बोला है कि साल 2018-19 (तालिका 4, 5, 6 व 7) के लिए स्वत: भरे हुए जीएसटीआर 9 में वित्त साल 2017-18 का डेटा भी शामिल है. हालांकि करदाताओं ने वित्त साल 2017-18 के लिए यह जानकारी पहले ही वित्त साल 2017-18 के लिए भरे गए वार्षिक रिटर्न (जीएसटीआर 9) में उपलब्ध करा दी है.

साल 2018-19 के लिए प्रपत्र जीएसटीआर-9 में दो सालों (2017-18 व 2018-19) को भिन्न-भिन्न दिखाने की कोई व्यवस्था नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रपत्र जीएसटीआर-9सी सिर्फ ऐसे करदाताओं के लिए भरना जरूरी है, जिनका वार्षिक टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा है, वहीं प्रपत्र जीएसटीआर-9 में मिलान विवरण सिर्फ 5 करोड़ रुपये से ज्यादा सकल टर्नओवर वाली दर्ज़ इकाइयों द्वारा उपलब्ध कराना होता है.

करदाताओं को सिर्फ वित्त साल 2018-19 से संबंधित मूल्य व वित्त साल 2017-18 से संबंधित मूल्य सूचित करने की जरूरत है, जिसे पहले ही सूचित कर दिया गया हो या नजरंदाज कर दिया गया हो. ऐसे मामलों में कोई प्रतिकूल दृष्टिकोण नहीं लिया जाएगा, जहां करदाताओं के वित्त साल 2018-19 के वार्षिक रिटर्न में वित्त साल 2017-18 से संबंधित आपूर्तियों व आईटीसी के विवरण को शामिल करते हुए पहले ही फाइल किए जा चुके वित्त साल 2018-19 के जीएसटीआर-9 में भिन्नताएं पाई गई हों. सभी करदाताओं से आगे बढ़ाई गई तारीख का लाभ उठाने व अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना वार्षिक रिटर्न (प्रपत्र जीएसटीआर 9) भरने का अनुरोध किया गया है. 

जनवरी से बीटूबी पर ई-चालान अनिवार्य

सरकार ने शुक्रवार को बोला कि 100 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले व्यवसायों को एक जनवरी 2021 से व्यवसायियों (बीटूबी) के बीच कारोबार के लिए जरूरी रूप से GST ई-चालान निकालना होगा. वित्त सचिव अजय भूषण पाण्डेय ने बोला कि ई-चालान प्रणाली से आखिर में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए GST रिटर्न दाखिल करने की वर्तमान प्रणाली समाप्त हो सकती है. पाण्डेय राजस्व सचिव भी हैं.

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत बिजनेस टु बिजनेस यानी थोक कारोबार के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले व्यवसायों को एक अक्टूबर से ई-चालान लेना जरूरी किया गया है. पाण्डेय ने बोला कि एक जनवरी 2021 तक यह 100 करोड़ रुपये के कारोबार वाले करदाताओं के लिए होगा व एक अप्रैल 2021 से थोक लेनदेन वाले सभी करदाताओं के लिए लागू हो जाएगा.

ई-चालान प्रणाली भौतिक चालान की स्थान ले लेगी व ये जल्द ही मौजूदा ई-वे बिल प्रणाली को समाप्त कर देगी व करदाताओं को अलग से ई-वे बिल जनरेट नहीं करना होगा. ई- चालान प्रणाली प्रारम्भ होने के सात दिन के भीतर ही सात अक्तूबर तक बीजक संदर्भ संख्या (आईआरएन) सृजन में 163 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई व यह 13.69 लाख तक पहुंच गया.