सरकार एसबीआई सहित छह बैंकों की बेच सकती है हिस्सेदारी

सरकार एसबीआई सहित छह बैंकों की बेच सकती है हिस्सेदारी

सरकार अगले एक से डेढ़ वर्ष में भारतीय स्टेट बैंक समेत छह सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 प्रतिशत कर सकती है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, आरबीआई (आरबीआई) ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि छह बड़े सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी घटाकर 51 प्रतिशत करनी चाहिए. रिजर्व बैंक ने यह सुझाव सरकारी बैंकों के निजीकरण को देखते हुए किया है.

आरबीआई का मानना है कि वर्तमान परिस्थिति में सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जाता है तो इसके नतीजे आईडीबीआई बैंक की तरह हो सकते हैं. इस बैंक में भारतीय ज़िंदगी बीमा निगम (एलआईसी) को सरकार से 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदनी पड़ी थी. इससे बैंकिंग व्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव होगा. इससे बचने के लिए सरकार को अपनी हिस्सेदारी कम करनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी), केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया व बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) में हिस्सेदारी घटाने का सुझाव दिया गया है. 

किस बैंक में सरकार की कितनी हिस्सेदारी

बैंक

सरकार की हिस्सेदारी

एसबीआई 56.92%
पीएनबी 83.19%
बैंक ऑफ बड़ौदा 71.60%
केनरा बैंक 78.55%
यूनियन बैंक 89.07%
इंडिया ">बैंक ऑफ इंडिया 89.10%

निजीकरण की भी खबरें आई थी

इससे पहले जुलाई महीने में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकार छह बैंकों के निजीकरण की तैयारी में है. इनमें बैंक ऑफ इंडिया , सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया , भारतीय ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र व पंजाब ऐंड सिंध बैंक शामिल हैं. इन बैंकों में सरकार अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. ऐसा करने पर ये बैंक व्यक्तिगत हाथों में चलाएंगे. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार देश में सिर्फ चार या पांच सरकारी बैंक ही बनाए रखने के मूड में हैं. हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है. 

मूल्यांकन बढ़ाने का प्रयास 

बैंकिंग विशेषज्ञों का बोलना है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मूल्यांकन को बढ़ाने के लिए कोशिश करने की तैयारी में है क्योंकि इन बैंकों के शेयरों का कारोबार उनके बुक वैल्यू से बहुत ज्यादा नहीं हो रहा है. येस बैंक संकट के बाद निवेशक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर देख रहे हैं व अगर हम मुनाफे में परिचालन करने की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं तो हम अपने दम पर पूंजी जुटाने में सक्षम होंगे. सूत्रों के अनुसार छह बैंक निकट भविष्य में कोई जोखिम वाला लोन नहीं देंगे व वित्त साल 2021 के अंत तक अपनी गैर-निष्पादित आस्तियों को कम से कम एक-तिहाई तक घटाने पर ध्यान देंगे.

विलय का विकल्प का खत्म

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैंकों के विलय के विकल्प पर पहले ही विराम लगा चुका है. ऐसे में सरकार हिस्सेदारी बेचने पर रणनीति बना रही है. बताते चलें कि सरकारी बैंकों पर एनपीए का बोझ कोरोना संकट से बहुत ज्यादा बढ़ने की संभावना है. ऐसे में विलय से लाभ मिलने की उम्मीद है. ऐसे में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी है.

निवेशकों के लिए निवेश का मौका 

बाजार विशेषज्ञों का बोलना है कि सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने से पुराने व नए दोनों के लिए बेहतरीन मौका है. हिस्सेदारी बेचने से बैंकों का मूल्यांकन में बढ़ोतरी होगी व शेयर मूल्य में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. यह पुराने निवेशकों को उनके निवेश पर शानदार रिटर्न दिलाने का कार्य करेगा. वहीं, नए निवेशकों को सरकारी बैंकों में निवेश का मौका मिलेगा. आने वाले समय में बैंकों का मूल्यांकन तेजी से बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि सरकारी बैंकों का मार्केट हिस्सेदारी व पूंजी के अनुरूप शेयर मूल्य नहीं है.