प्रॉफिट 16.6% बढ़ कर 5,197 करोड़ रुपए रहा, विप्रो को 2,966 करोड़ का फायदा

प्रॉफिट 16.6% बढ़ कर 5,197 करोड़ रुपए रहा, विप्रो को 2,966 करोड़ का फायदा

देश की दो दिग्गज IT सर्विसेज कंपनियों इंफोसिस और विप्रो ने बुधवार को दिसंबर तिमाही का दमदार फाइनेंशियल रिजल्ट जारी किया। इंफोसिस का नेट प्रॉफिट जहां YoY 16.6% बढ़ा, वहीं विप्रो का प्रॉफिट YoY 20.8% बढ़ा। देश की सबसे बड़ी IT कंपनी TCS ने भी पिछले दिनों जारी किए गए अपने तिमाही नतीजे में कहा था कि दिसबर तिमाही में उसका नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 7.2 फीसदी बढ़ा है।

दिसंबर तिमाही को IT सर्विस कंपनियों के लिए कमजोर तिमाही माना जाता है, क्योंकि दुनियाभर में इस दौरान कई छुटि्टयां होती हैं। लेकिन कोरोनावायरस और लॉकडाउन के कारण इस बार दिसंबर तिमाही में ही कारोबारी गतिविधियां शुरू हुई हैं। तीनों प्रमुख IT सर्विस कंपनियों ने दिसंबर तिमाही में कई साल का सबसे मजबूत रिजल्ट दिया है।

इंफोसिस के रेवेन्यू में डिजिटल सेगमेंट का हिस्सा 50% के पार पहुंचा

इंफोसिस ने कहा कि उसका नेट प्रॉफिट दिसंबर तिमाही में साल-दर-साल आधार पर 16.6% और तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 7.3 फीसदी बढ़कर 5,197 करोड़ रुपए रहा। कंपनी का रेवेन्यू इस दौरान YoY 12.3% और QoQ 5.5% बढ़कर 25,927 करोड़ रुपए रहा। इस दौरान कंपनी के टोटल रेवेन्यू में डिजिटल रेवेन्यू का हिस्सा 50% के पार पहुंच गया।

इंफोसिस का ऑपरेटिंग मार्जिन 25.4% रहा

इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (IFRS) के मुताबिक रुपए के वैल्यू में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 25.4% रहा। IT सर्विसेज सेगमेंट का वॉलंट्री एट्रीशन 10% रहा, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 15.8% था। कंपनी ने इस पूरे कारोबारी साल के लिए अपने रेवेन्यू में 4.5%-5.0% बढ़ोतरी और ऑपरेटिंग मार्जिन 24.0%-24.5% रहने का अनुमान दिया है। कंपनी ने दिसंबर तिमाही में कोई डिविडेंड नहीं दिया।

इंफोसिस में 38.3% महिला कर्मचारी

इंफोसिस ने कहा कि उसके कर्मचारियों में 38.3% महिला कर्मचारी हैं। कंपनी के पास दिसंबर तिमाही में कुल 2,49,312 कर्मचारी थे। इस दौरान कंपनी का एट्र्रीशन रेट (नौकरी छोड़ने वाले) 10 फीसदी रहा।

विप्रो का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही के मुकाबले 20.3% बढ़ा

IFRS के मुताबिक दिसंबर तिमाही में विप्रो का नेट प्रॉफिट YoY 20.8% बढ़कर 2,966.7 करोड़ रुपए रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि में 2,455.8 करोड़ रुपए था। सितंबर तिमाही के मुकाबले कंपनी का नेट प्रॉफिट 20.3% बढ़ा है। ग्रॉस रेवेन्यू YoY 1.3% बढ़कर 15670 करोड़ रुपए रहा, जो सितंबर तिमाही के मुकाबले 3.7% ज्यादा है।

विप्रो का ऑपरेटिंग कैश फ्लो YoY 45% बढ़ा

विप्रो की प्रति शेयर आय साल-दर-साल आधार पर 20.7% बढ़कर 5.21 रुपए रही। कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो 4,430 करोड़ रुपए रहा, जो नेट प्रॉफिट का 149.4% है। ऑपरेटिंग कैश फ्लो साल-दर-साल आधार पर 45% बढ़ा है।

विप्रो के IT सर्विसेज का रेवेन्यू QoQ 3.9% बढ़ा

विप्रो के IT सर्विसेज का रेवेन्यू QoQ 3.9% बढ़ा, जो पिछले 9 साल की सबसे तेज रफ्तार है। IT सेगमेंट का ऑपरेटिंग मार्जिन 21.7% रहा, जो 22 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। मार्च 2021 तिमाही में कंपनी ने IT सर्विसेज बिजनेस के लिए दिसंबर तिमाही के मुकाबले 1.5%-3.5% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान दिया।

विप्रो के कर्मचारियों की कुल संख्या 1,90,308 रही

विप्रो के कर्मचारियों की कुल संख्या दिसंबर तिमाही में 1,90,308 रही और एट्रीशन रेट 11% रहा। कंपनी ने अपने हर शेयर पर 1 रुपया का अंतरिम लाभांश देगी। लाभांश के लिए रिकॉर्ड डेट 25 जनवरी 2021 है। 2 फरवरी तक शेयरधारकों को लाभांश का भुगतान हो जाएगा।


नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर सरकार जिस तरह से पूरी ताकत से जुटी है, उससे साफ है कि इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बजट में अलग से वित्तीय प्रविधान किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन भी दिया है। इसमें नीति के अमल से जुड़ी जरूरतों को प्रमुखता से रखा गया है। वैसे भी देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में जिस तरह स्कूली बच्चों को नई नीति के तहत किताबें मुहैया कराने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं, उसमें ज्यादा जरूरत पैसों की होगी।

खास बात यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में साफ कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए जरूरी है कि शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च का बीस फीसद राशि खर्च की जाए। जो मौजूदा समय में कुल सरकारी खर्च का सिर्फ दस फीसद ही है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें, तो नीति में भले ही शिक्षा पर खर्च में दोगुनी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, लेकिन यह मौजूदा परिस्थितियों में एक साथ करना संभव नहीं है। यह जरूर है कि यह बढ़ोतरी आने वाले सालों में एक क्रमबद्ध तरीके से की जा सकती है। इसकी शुरुआत सरकार की ओर से इसी साल से की जा सकती है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर वैसे तो शिक्षा मंत्रालय ने दो क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें एक क्षेत्र ऐसा है, जिनमें उन सारी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके अमल के लिए पैसों की कोई जरूरत नहीं होगी। बल्कि इन्हें मंत्रालय के स्तर पर प्रशासनिक तरीके से अंजाम दिया जाना है। जबकि दूसरे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को रखा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत होगी।


फिलहाल इनमें जो अमल है, उनमें स्कूली बच्चों को खाने के साथ नाश्ता भी देना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, स्कूली शिक्षा में प्री-स्कूल को शामिल करना, शिक्षकों के खाली पदों को भरना, शोध को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने सहित ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार इस बार शिक्षा नीति के अमल को लेकर कुछ सतर्क भी है, क्योंकि इससे पहले जो नीति बनाई गई, उस पर पैसों के अभाव में ठीक से अमल नहीं हो सका था। हरेक नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसद तक खर्च करने की सिफारिश की गई, लेकिन अभी भी शिक्षा पर जीडीपी के चार फीसद के आसपास खर्च किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शिक्षा का कुल बजट करीब एक लाख करोड़ रुपये था।


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