ऐप से लोन बांटने वाली कंपनियों की कसी जाएगी नकेल, RBI ने रेगुलेशन के लिए बनाया वर्किंग ग्रुप

ऐप से लोन बांटने वाली कंपनियों की कसी जाएगी नकेल, RBI ने रेगुलेशन के लिए बनाया वर्किंग ग्रुप

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए लोन बांटने के कारोबार को नियंत्रित करने के मकसद से वर्किंग ग्रुप बनाया है। यह कदम देशभर में ऐसे एप्लिकेशन की आई बाढ़ के बीच वसूली के गलत तौर-तरीकों को लेकर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है। हाल के समय में लोन ऐप के बहुत ही ऊंचे इंटरेस्ट रेट, उनसे जुड़े फ्रॉड और डेटा रिस्क को लेकर पब्लिक की तरफ से काफी चिंताएं जताई जा रही थीं।

डिजिटल लेंडिंग में उछाल ने सिस्टम के लिए पैदा की चिंता

ऐप बेस्ड डिजिटल लेंडिंग से जुड़ी चिंताओं को लेकर रिजर्व बैंक ने बुधवार को एक बयान जारी किया। उसने बयान में कहा है कि ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल लेंडिंग ऐप यानी डिजिटल लेंडिंग में तेज उछाल आई है, इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि इसने कुछ चिंताएं पैदा की हैं, जो सिस्टम के लिए नुकसानदेह होने की तरफ इशारा करती है।

ऐप लेंडिंग के तौर-तरीके को हर एंगल से स्टडी करेगा RBI

रिजर्व बैंक ने कहा कि वर्किंग ग्रुप डिजिटल लेंडिंग के तौर-तरीकों को हर एंगल से स्टडी करेगा। स्टडी के दायरे में रेगुलेटेड फाइनेंशियल और अनरेगुलेटेड प्लेयर को लाया जाएगा। इससे उनके लिए समुचित रेगुलेटरी सिस्टम बनाया जा सकेगा।

छह मेंबर वाले वर्किंग ग्रुप में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट भी

छह मेंबर वाले वर्किंग ग्रुप में रिजर्व बैंक के चार अफसर होंगे। वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष आरबीआई के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर जयंत कुमार दास होंगे। ग्रुप को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में तैयार करनी होगी। मोनेक्सो के को-फाउंडर विक्रम मेहता और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट राहुल शशि ग्रुप के बाहरी मेंबर होंगे। वर्किंग ग्रुप से अनरेगुलेटेड लेंडिंग ऐप से कंज्यूमर को होने वाले खतरों की पहचान करने के लिए कहा गया है।

फाइनेंशियल प्रॉडक्ट के लिए बढ़ी फिनटेक इनोवेशन की अहमियत ​​​​​​

रिजर्व बैंक का कहना है कि फिनटेक कंपनियों के इनोवेशन कुछ साल पहले तक सपोर्टिंग रोल निभाते थे। ये अब फाइनेंशियल प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज की डिजाइनिंग, प्राइसिंग और डिलीवरी का अहम हिस्सा हो गए हैं। फाइनेंशियल सेक्टर में डिजिटल मेथड की बढ़ती पहुंच स्वागतयोग्य है, लेकिन इनमें फायदों के साथ जोखिम भी होते हैं। ऐसे में लेंडिंग स्पेस में इनोवेशन को सपोर्ट देने के लिए संतुलित तरीका अपनाना जरूरी है। इसके साथ ही डेटा सिक्योरिटी, प्राइवेसी और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

RBI ने संदिग्ध लेंडिंग ऐप से बचने को लेकर आगाह किया था

रिजर्व बैंक ने दिसंबर में फटाफट लेकिन ऊंची ब्याज दर पर लोन बांटने वाले संदिग्ध ऐप से बचने को लेकर आगाह किया था। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि फटाफट लोन बांटने वाले ऐप बहुत ज्यादा ब्याज ले रहे हैं। उनमें कुछ ऐसे चार्ज होते हैं जिनके बारे में लोन लेते वक्त बॉरोअर को बताया नहीं जाता और वसूली के गलत तौर तरीके अपनाए जाते हैं। कलेक्शन एजेंटों के हाथों बॉरोअर के मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल होने की भी खबरें आई थीं।


नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर सरकार जिस तरह से पूरी ताकत से जुटी है, उससे साफ है कि इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बजट में अलग से वित्तीय प्रविधान किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन भी दिया है। इसमें नीति के अमल से जुड़ी जरूरतों को प्रमुखता से रखा गया है। वैसे भी देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में जिस तरह स्कूली बच्चों को नई नीति के तहत किताबें मुहैया कराने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं, उसमें ज्यादा जरूरत पैसों की होगी।

खास बात यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में साफ कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए जरूरी है कि शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च का बीस फीसद राशि खर्च की जाए। जो मौजूदा समय में कुल सरकारी खर्च का सिर्फ दस फीसद ही है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें, तो नीति में भले ही शिक्षा पर खर्च में दोगुनी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, लेकिन यह मौजूदा परिस्थितियों में एक साथ करना संभव नहीं है। यह जरूर है कि यह बढ़ोतरी आने वाले सालों में एक क्रमबद्ध तरीके से की जा सकती है। इसकी शुरुआत सरकार की ओर से इसी साल से की जा सकती है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर वैसे तो शिक्षा मंत्रालय ने दो क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें एक क्षेत्र ऐसा है, जिनमें उन सारी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके अमल के लिए पैसों की कोई जरूरत नहीं होगी। बल्कि इन्हें मंत्रालय के स्तर पर प्रशासनिक तरीके से अंजाम दिया जाना है। जबकि दूसरे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को रखा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत होगी।


फिलहाल इनमें जो अमल है, उनमें स्कूली बच्चों को खाने के साथ नाश्ता भी देना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, स्कूली शिक्षा में प्री-स्कूल को शामिल करना, शिक्षकों के खाली पदों को भरना, शोध को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने सहित ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार इस बार शिक्षा नीति के अमल को लेकर कुछ सतर्क भी है, क्योंकि इससे पहले जो नीति बनाई गई, उस पर पैसों के अभाव में ठीक से अमल नहीं हो सका था। हरेक नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसद तक खर्च करने की सिफारिश की गई, लेकिन अभी भी शिक्षा पर जीडीपी के चार फीसद के आसपास खर्च किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शिक्षा का कुल बजट करीब एक लाख करोड़ रुपये था।


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