पटना की श्रद्धा ने गढ़ दीं हजारों कहानियां, बनाया ऐसा मंच जिसपर विचारों को दे सकते हैं आकार

पटना की श्रद्धा ने गढ़ दीं हजारों कहानियां, बनाया ऐसा मंच जिसपर विचारों को दे सकते हैं आकार

13 साल पहले जैसे कहीं कोई बिजली चमकी। मन में कौंधा एक विचार, पर आगे बढ़ें कि न बढ़ें...,और फिर तत्क्षण एक निर्णय। वह निर्णय ही मानो भविष्य की पतवार हो। अपनी इस पतवार पर भरोसा कर विचार की वह नौका उतर पड़ी अनिश्चितता के समुद्र में, जहां से निकलीं एक लाख से अधिक कहानियां। सिलसिला जारी है। निर्णय लेने और उन पर अडिग रहने की मां महागौरी की शक्ति का अनुसरण करते हुए श्रद्धा शर्मा ने जो निर्णय लिया उसने उन्हें दी अंतरराष्ट्रीय पहचान। 'योर स्टोरी डाट काम' की संस्थापक श्रद्धा के एक दृढ़ निश्चय ने ऐसी कहानियों का सिलसिला शुरू किया, जो धीरे-धीरे बन गया एक-दूसरे से सफलता-असफलता साझा करते हुए आगे बढ़ने का विशाल मंच। यहां आज की तारीख में हैं लोगों द्वारा साझा की गईं संघर्ष और सफलता की एक लाख बीस हजार कहानियां।

औरों के लिए भी रोजगार बना एक विचार 

'योर स्टोरी डाट काम', यानी एक ऐसा मंच जिस पर हर कोई अपनी कहानी को आकार दे सकता है। स्टार्ट अप और युवा उद्यमियों के प्रेरक किस्से। श्रद्धा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रोत्साहित किया और उद्योगपति रतन टाटा ने भी। कारवां ऐसा बढ़ा कि 13 साल पहले के एक विचार पर लिया गया उनका निर्णय उस कंपनी में तब्दील हो गया, जहां दो सौ से अधिक लोग कार्य कर रहे हैं। एक विचार का फलीभूत होना सिर्फ अपने लिए नहीं था। यह औरों के लिए भी अवसर लेकर आया। इस कंपनी में काम करने वालों में पचास फीसद महिलाएं हैं।

रच-बस गईं अपने सपनों में 

बेंगलुरू में अपनी कंपनी का संचालन कर रहीं श्रद्धा पटना की हैं। यहीं के नोट्रेडम स्कूल से उच्च माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सेंट स्टीफेंस कालेज, दिल्ली से परास्नातक किया। मुद्रा इंस्टीटयूट आफ कम्युनिकेशंस, अहमदाबाद से प्रबंधन की पढ़ाई के बाद अच्छी नौकरी लगी, पर जोखिम उठाते हुए 2008 से ही योर स्टोरी में रच-बस गईं। तीन साल बाद अपनी कंपनी के रूप में नई राह स्वागत कर रही थी।


पढ़ाई के समय ही बीजारोपण 

हर महीने एक करोड़ से अधिक लोग इस मंच पर लोगों की कहानियां पढ़ रहे हैं। श्रद्धा ने जो निर्णय लिया, वह आसान नहीं था, पर इसका बीजारोपण जैसे पढ़ाई के समय ही हो चुका हो। वह बताती हैं, तब स्टीफेंस कालेज में थीं। जब दोस्तों से बात करतीं तो वह कहते, फिर से बोलो न। वह बोलतीं और दोस्त हंसने लगते। उन्हें बाद में यह बात समझ में आई कि दोस्त उनके बिहारीपन से भरे लहजे को सुनना चाहते थे। उन्होंने इसे बहुत सकारात्मक रूप में लिया। यह उनकी खुद की कहानी थी। बस यहीं से सोचा कि हर किसी की कोई न कोई कहानी, अनुभव तो होगा। क्यों न इसे एक मंच दिया जाए।


आज औरों के लिए भी प्रेरणा

यह सवाल मन में उठता रहा था। मीडिया के क्षेत्र में नौकरी के बाद वह विचार फिर कौंधा और एक झटके में ले लिया निर्णय। अपना सफर शुरू करने और लोगों को जोड़ने का। एक महिला के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होतीं। मुश्किलें भी आईं, पर कदम बढ़ते गए। हिंदी, अंग्रेजी और तमिल भाषा में आए दिन कोई नई कहानी योर स्टोरी पर पढ़ाई जाती है। अब जर्मनी, यूके और दुबई में भी इसे विस्तार देने की कवायद चल रही है। श्रद्धा का सफर हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है।


समस्तीपुर में नामांकन के दौरान रुपये बांट रहे निवर्तमान मुखिया का वीडियो वायरल

समस्तीपुर में नामांकन के दौरान रुपये बांट रहे निवर्तमान मुखिया का वीडियो वायरल

पटोरी प्रखंड कार्यालय परिसर में एक निवर्तमान मुखिया के द्वारा नामांकन के पश्चात सरकारी कर्मी और पुलिसकर्मियों के बीच रुपये बांटने का वीडियो वायरल हुआ है। वायरल वीडियो इंटरनेट मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे काफी तेजी से शेयर किया जा रहा है तथा कई प्रकार के कमेंट्स भी आ रहे हैं। हालांकि दैनिक जागरण इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है किंतु इसकी शिकायत पटोरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी सह निर्वाचन अधिकारी को लिखित रूप से मिली है। शिकायत मिलने के पश्चात प्रखंड विकास पदाधिकारी ने इस मामले की छानबीन का जिम्मा पटोरी के सीओ सह नोडल पदाधिकारी विकास कुमार को सौंप दिया है।


वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखाया गया है कि पटोरी प्रखंड के हरपुर सैदाबाद के निवर्तमान मुखिया अवधेश राय नामांकन के पश्चात प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थित मंदिर में पूजा अर्चना के पश्चात पुलिस और सरकारी कर्मियों तथा वहां मौजूद लोगों के बीच 500 रुपए के नोट बांटते नजर आ रहे हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर पटोरी के अंचल पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया की वायरल वीडियो तथा मिली शिकायत के पश्चात अभ्यर्थी के विरुद्ध आचार संहिता के उल्लंघन की प्राथमिकी पटोरी थाने में दर्ज कराई गई है।

 
बिना नामांकन कराए बैरंग लौटी महिला मुखिया प्रत्याशी

वारिसनगर। प्रखंड में शनिवार से शुरू हुए नामांकन प्रक्रिया में तब अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। जब मोहिउद्दीनपुर पंचायत से नामांकन करने आयी एक महिला प्रत्याशी को प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रखंड निर्वाची पदाधिकारी रंजीत कुमार वर्मा ने बिना नामांकन कराए बैरंग वापस कर दिया। उनका बताना था कि उक्त पंचायत से अंशु कुमारी पति आशीष आनंद मुखिया पद से नामांकन करने आयी थी। परंतु उनके द्वारा प्रस्तुत कागजात में जन्मतिथि 30 अगस्त 2001 होने पर निर्वाचन के लिए तय उम्र सीमा 21 वर्ष की अहर्ता पूर्ण नही करने के कारण उसके नामांकन पत्र को वापस कर दिया गया। बताया गया कि बीडीओ ने कहा कि उम्र 20 साल ही पूरा हो रहा है। ऐसे में नामांकन के बाद भी वह रद हो जाएगा। इस पर प्रत्याशी बिना नामांकन किए हुए वापस लौट गई।